माघ मेले में मंगलवार को कुंभ जैसा नजारा दिखा। मेला क्षेत्र की ओर जाने वाली हर सड़क श्रद्धालुओं की भीड़ से पटी रही तो मेले में घाटों और पांटून पुलों पर भी पैर रखने की जगह नहीं बची। अफसरों ने भी पिछली गलतियों से सबक लेते हुए मौनी की तैयारियों में जो सुधार किए, उसका असर देखने को मिला। वीआईपी घाट हो या कोई सामान्य घाट, खास हो या आम, हर घाट से सबको नाव से संगम तक जाने की अनुमति दी गई।
पुलिस के जवान भी भद्र और शालीन नजर आए। कमिश्नर बीके सिंह, डीएम भवनाथ सिंह, एडीएम सिटी एसके शर्मा, प्रभारी अधिकारी मेला अरुण कुमार सिंह सहित प्रशासन और पुलिस के तमाम अफसर दिनभर मेले का चक्कर काटते रहे। शाम होते-होते भीड़ के साथ अफसरों के चेहरे पर झलकता तनाव भी कम होने लगा। प्रशासन का दावा है कि मौनी अमावस्या पर तकरीबन 90 लाख श्रद्धालु मेले में पहुंचे।
मौनी अमावस्या पर मंगलवार को शहर की सड़कों के साथ मेला क्षेत्र भी स्नानार्थियां से खचाखच भरा रहा। घाट पर पैर रखने की भी जगह नहीं बची। भीड़ के कारण रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर भी अफरतफरी का माहौल रहा। शहर में कई जगह ट्रैफिक डायवर्ट कर दिए जाने से लोगों को दिक्कत भी झेलनी पड़ी। मेला क्षेत्र के साथ रेलवे स्टेशनों में भी हर प्रकार के वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहा। भीड़ अनुमान के मुताबिक पहुंची और तैयारियां भी उसी हिसाब से की गई थीं। इसके बावजूद अफसरों को आशंका सता रही थी कि कहीं कोई घटना न हो जाए। फिलहाल ऐसा कुछ नहीं हुआ और अफसरों ने राहत की सांस ली।
अफसरों को यह बात मालूम थी कि घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ को संभाल पाना सबसे बड़ी चुनौती होगी, सो स्नान पर्व से एक दिन पहले ही सबसे प्रमुख संगम घाट की लंबाई 400 फीट और रामघाट की लंबाई 50 फीट और बढ़ा दी गई। इन दोनों घाटों पर चेंजिंग रूम की संख्या भी बढ़ा दी गई। साथ ही दोनों जगह जीरो डिस्चार्ज वाले दो-दो टॉयलेट भी रखवा दिए गए, जिन्हें आईआईटी कानपुर से मंगाया गया था। इन टॉयलेट्स की वजह से घाट के आसपास की जगह साफ-सुथरी बनी रही। वहीं, सुरक्षा कर्मी भी घाटों पर पैनी नजर रखे हुए थे। उन्होंने फूल-माल और प्रसाद बेचने वालों को घाट से दूर कर दिया गया था। डीएम भवनाथ सिंह का कहना है कि मौनी अमावस्या पर पिछले साल के मुकाबले अधिक संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और व्यवस्था भी बेहतर रही। कहीं कोई घटना प्रकाश में नहीं आई।