आरओ (समीक्षा अधिकारी) भर्ती परीक्षा में जीआरपी इलाहाबाद ने क्राइम ब्रांच की मदद से 16 लोगों को गिरफ्तार किया है जबकि सरगना राधेश्याम पांडेय समेत दो आरोपी फरार हो गए। पकड़े गए लोगों में आठ परीक्षार्थी और आठ कक्ष निरीक्षक हैं। पूछताछ में पता चला कि पहले तो परीक्षार्थियों को ईयर पीस और उनके कपड़ों में छिपाए जीपीएस डिवाइस के जरिए सवालों के जवाब बताए जाने थे लेकिन मामला खुलने पर फर्जी कक्ष निरीक्षकों के मोबाइल फोन पर व्हाट्स एप के सहारे हल बताने का रास्ता निकाला गया। गिरफ्तार सभी 16 लोगों को रेलवे मजिस्ट्रेट के आदेश पर सोमवार शाम न्यायिक हिरासत में नैनी सेंट्रल भेज दिया गया है।
सीओ रेलवे मोनिका चड्ढा ने मीडिया को बताया कि जीआरपी थाना प्रभारी मनोज सिंह ने रविवार शाम गेट नंबर तीन सुलभ काम्पलेक्स के पास जनपद की क्राइम ब्रांच के साथ घेराबंदी कर 16 लोगों को हिरासत में लेकर तलाशी ली। पूछताछ की तो समीक्षा अधिकारी परीक्षा में पास कराने का ठेका लेने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ। एक कार भी जब्त की गई। सीओ ने बताया कि पकड़े गए लोगों में आठ प्रतियोगी छात्र हैं जबकि आठ फर्जी कक्ष निरीक्षक हैं, जिन्हें केंद्रों में असली कक्ष निरीक्षकों की जगह तैनात किया गया था। पूछताछ में पता चला कि लखनऊ में परीक्षा से पहले एसटीएफ द्वारा गिरोह के लोगों की धरपकड़ के बाद नकल कराने का तरीका बदला गया था। पहले परीक्षार्थियों को ईयर पीस के अलावा एक जीपीएस डिवाईस दी गई थी जिसे बनियान में छिपाकर चिपकाना था। उसके जरिए ही उन्हें परीक्षा के दौरान सवालों के जवाब बताए जाने थे। मगर इलाहाबाद में परीक्षा से पहले तरीका बदलते हुए फर्जी कक्ष निरीक्षकों को मोबाइल फोन दिए गए, जिनमें व्हाट्स एप पर कोर्ट नाम से एक ग्रुप बनाकर सवालों के जवाब पोस्ट किए जा रहे थे।