कटरा में आनंद अस्पताल चौराहे के पास स्थित लकड़ी के गोदाम में भोर में भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने बगल में स्थित तीन मंजिला मकान में बने टाइल्स शोरूम को भी चपेट में ले लिया। घटना में लगभग एक करोड़ के नुकसान का अनुमान है। घटना का कारण अभी स्पष्ट नहीं है लेकिन, आशंका है कि आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी।
कटरा के रहने वाले सुजीत जायसवाल पुत्र सीताराम लकड़ी का कारोबार करते हैं। कटरा में आनंद अस्पताल चौराहे के पास उनका रंजीत ट्रेडर्स के नाम से गोदाम है, जिसमें बड़ी मात्रा में लकड़ी रखी है। बगल में ही सुधीर केसरवानी पुत्र गंगाप्रसाद व उनके भाइयों का तीन मंजिला मकान है। इसमें भूतल पर टाइल्स व सेनेटरी सामान का शोरूम है जबकि, ऊपरी मंजिल पर उनका परिवार रहता है। बृहस्पतिवार भोर में करीब 3.30 बजे अचानक लकड़ी गोदाम में आग लग गई।
आधे घंटे तक तो किसी को खबर भी नहीं हुई। चार बजे के करीब गोदाम से लपटें उठने देख एक राहगीर ने फायर ब्रिगेड को सूचना दी। 4.15 बजे के करीब फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और आग बुझाने में जुट गई। हालांकि आग हर बीतते पल के साथ फैलती जा रही थी और जल्द ही यह पूरे गोदाम में फैल गई। कुछ देर बाद आग पीछे की ओर से टाइल्स शोरूम में भी पहुंच गई और फिर यहां रखे प्लास्टिक की टोटियां, पाइप व अन्य सेनेटरी सामान भी इसकी चपेट में आ गए।
जिससे आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। यही नहीं मकान के प्रथम तल पर बने कार्यालय को भी चपेट में ले लिया। हालात बेकाबू होते देख मौके पर एक के बाद एक आठ फायरब्रिगेड की गाड़ियां बुलाई गईं। इनमें शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित फायर स्टेशन की गाड़ियां भी शामिल थीं। सूचना पर एसपी सिटी बृजेश कुमार श्रीवास्तव भी पहुंच गए। पांच घंटे की मशक्कत के बाद 9.30 बजे के करीब गोदाम में लगी आग पर तो काफी हद तक काबू पा लिया गया लेकिन बगल स्थित शोरूम व ऊपरी तल पर लगी आग नहीं बुझाई जा सकी।
पहर करीब 12 बजे आठ घंटे की मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका लेकिन तब तक करीब एक करोड़ का माल राख हो चुका था। कर्नलगंज पुलिस के मुताबिक, नुकसान का सही आंकड़ा फिलहाल नहीं मिल सका है। लेकिन लकड़ी व्यापारी ने 30-35 व टाइल्स कारोबारी ने 40-50 लाख के नुकसान की आशंका जताई है। आग की वजह पर पुलिस का कहना है कि फिलहाल कुछ स्पष्ट नहीं कहा जा सकता। लेकिन आशंका है कि घटना की शॉर्ट सर्किट रही हो। जांच पड़ताल की जा रही है।
जिस वक्त आग लगी, मकान के ऊपरी तल पर बने कमरों में परिवार सो रहा था। शोरगुल सुनकर नींद टूटी तो नीचे का नजारा देख उनके होश उड़ गए। पीछे की ओर स्थित गोदाम से भीषण लपटें उठ रही थीं और वहां चीखपुकार मची थी। मौके पर पहुंचे फायरकर्मियों ने किसी तरह परिवार के लोगों को नीचे उतारा और इसके बाद सभी ने राहत की सांस ली। हालांकि आंखों के सामने दुकान व मकान जलता देख उनकी आंखों से आंसू बहते रहे।
आग कितनी भयावह थी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भीषण गर्मी के चलते टाइल्स शोरूम की दीवारें तक चिटक र्गईं। यही नहीं लोहे के दरवाजे तक टेढ़े हो गए। फायरकर्मियों ने बताया कि व्यापारी ने भूतल पर पीछे की ओर गोदाम बना रखा था। दुर्भाग्यवश पीछे की ओर बने रोशनदान के जरिए ही आग गोदाम तक पहुंची। यही वजह रही कि आग जैसे ही गोदाम में रखे सेनेटरी सामान तक पहुंचीं, वहां से लपटें उठने लगीं। कुछ ही देर में आग ने गोदाम के साथ ही दुकान को चपेट में ले लिया और फिर लपटें प्रथम तल पर बने कार्यालय तक पहुंच गई।
आग बुझाने के दौरान सिविल लाइंस फायर स्टेशन में तैनात फायरमैन धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने एक बार फिर जांबाजी का परिचय दिया और इस दौरान भीषण तपिश की चपेट में आने से उनकी तबियत भी बिगड़ गई। भूतल पर लगी आग पर काबू पाने के लिए वह साथियों संग लगे हुए थे। हालांकि पीछे की ओर तक पानी की बौछार न पहुंच पाने के कारण कोई विशेष फायदा नहीं हो रहा था। जिसके बाद धर्मेंद्र ने प्रथम तल पर पहुंचकर कमरे के भीतर से पानी की बौछार फेंकनी शुरू की। जिसका फायदा भी हुआ और आग पर काफी हद तक काबू भी पा लिया गया। लेकिन इस दौरान भीषण तपिश के चलते धर्मेंद्र की तबियत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। डॉक्टरों ने उनकी हालत खतरे से बाहर बताई है।