केस नंबर 1- गौहनिया निवासी महिला 39 वर्ष की उम्र में गर्भवती हुई। वहीं करीब एक महीने पहले महिला को प्रसव के लिए एसआरएन अस्पताल लाया गया। जहां जच्चा व बच्चा दोनों की स्थिति गंभीर नजर आ रही थी। जबकि महिला के ससुराल वाले सामान्य प्रसव चाहते थे। लेकिन मां व बच्चे के जीवन को सुरक्षित रखने के लिए सर्जरी से प्रसव कराना पड़ा।
केस नंबर 2- सिविल लाइंस निवासी 28 वर्षीय गर्भवती स्त्री को दो सप्ताह पहले एसआरएन अस्पताल के महिला रोग विभाग में प्रसव के लिए लाया गया। महिला प्रसव की पीड़ा को बर्दास्त नहीं कर पा रही थी। ऐसे में दो ही घंटे के अंदर परिजनों से सिजेरियन प्रसव का दबाव बनाना शुरू कर दिया, जिसके बाद महिला का प्रसव सर्जरी के माध्यम से कराया गया।
केस नंबर 3- सोहबतियाबाग निवासी 25 वर्षीय गर्भवती स्त्री को नवंबर महीने के प्रथम सप्ताह में एसआरएन अस्पताल प्रसव के लिए लाया गया। इस दौरान जांच में पता चला, कि महिला को शुगर लेवल बढ़ा हुआ है। इसके अलावा ब्लड प्रेशर भी अनियंत्रित है। वहीं काउंसलिंग में महिला ने बताया कि वह बहुत कम शारीरिक श्रम करती थी। वहीं महिला की हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने सिजेरियन प्रसव करने का निर्णय लिया।
अधिक उम्र में शादी होना, अनियमित दिनचर्या, शारीरिक श्रम का काम होना सिजेरियन प्रसव को बढ़ा रहा है। इसके अलावा अधिकांश लोग प्रसव की पीड़ा से बचने के लिए भी सिजेरियन प्रसव पर जोर देते हैं। - डॉ. अमृता चौरसिया, विभागाध्यक्ष, स्त्री रोग, एमएलएन मेडिकल कॉलेज