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Health : अधिक उम्र में शादी होना अधिक सिजेरियन प्रसव का बन रहा कारण, औसत से ज्यादा हो रहा आपरेशन

Sat, 30 Nov 2024 02:06 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग की विभागाध्यक्ष डॉ. अमृता चौरसिया का कहना है, महिलाओं के गर्भवती बनने की उचित उम्र 30 वर्ष से कम होनी चाहिए। मगर वर्तमान में 37 से 38 उम्र तक में शादी होती है, जिसकी वजह से प्रसव जटिल हो जाता है।
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प्रसव। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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अधिक उम्र में शादी होना महिलाओं में प्रसव की समस्या को जटिल बना रहा है। जिसकी वजह से अधिकांश प्रसव सिजेरियन पद्धति से हो रहे हैं। सिर्फ अप्रैल 2024 से अक्तूबर तक की बात करें तो जिला महिला चिकित्सालय (डफरिन) में 62.6, स्वरूप रानी अस्पताल (एसआरएन) में 71.6 व कमला नेहरू मेमोरियल अस्पताल में 89 फीसदी प्रसव सर्जरी के माध्यम से हुआ है। जबकि विश्व हेल्थ स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार 5 से 15 फीसदी ही सिजेरियन प्रसव होना चाहिए। मगर निरंतर सामान्य प्रसव की संख्या में कमी आई है।

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मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग की विभागाध्यक्ष डॉ. अमृता चौरसिया का कहना है, महिलाओं के गर्भवती बनने की उचित उम्र 30 वर्ष से कम होनी चाहिए। मगर वर्तमान में 37 से 38 उम्र तक में शादी होती है, जिसकी वजह से प्रसव जटिल हो जाता है। इसे अलावा शारीरिक श्रम न करने की वजह ब्लड प्रेशर व शुगर की समस्या के कारण भी सिजेरियन प्रसव होता है। वहीं कई महिलाएं प्रसव के समय की पीड़ा से बचने के लिए सर्जरी से प्रसव कराने पर जोर देती हैं। ऐसे ही कुछ मामले नजीर के तौर पर हैं।

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केस नंबर 1- गौहनिया निवासी महिला 39 वर्ष की उम्र में गर्भवती हुई। वहीं करीब एक महीने पहले महिला को प्रसव के लिए एसआरएन अस्पताल लाया गया। जहां जच्चा व बच्चा दोनों की स्थिति गंभीर नजर आ रही थी। जबकि महिला के ससुराल वाले सामान्य प्रसव चाहते थे। लेकिन मां व बच्चे के जीवन को सुरक्षित रखने के लिए सर्जरी से प्रसव कराना पड़ा।

केस नंबर 2- सिविल लाइंस निवासी 28 वर्षीय गर्भवती स्त्री को दो सप्ताह पहले एसआरएन अस्पताल के महिला रोग विभाग में प्रसव के लिए लाया गया। महिला प्रसव की पीड़ा को बर्दास्त नहीं कर पा रही थी। ऐसे में दो ही घंटे के अंदर परिजनों से सिजेरियन प्रसव का दबाव बनाना शुरू कर दिया, जिसके बाद महिला का प्रसव सर्जरी के माध्यम से कराया गया।

केस नंबर 3- सोहबतियाबाग निवासी 25 वर्षीय गर्भवती स्त्री को नवंबर महीने के प्रथम सप्ताह में एसआरएन अस्पताल प्रसव के लिए लाया गया। इस दौरान जांच में पता चला, कि महिला को शुगर लेवल बढ़ा हुआ है। इसके अलावा ब्लड प्रेशर भी अनियंत्रित है। वहीं काउंसलिंग में महिला ने बताया कि वह बहुत कम शारीरिक श्रम करती थी। वहीं महिला की हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने सिजेरियन प्रसव करने का निर्णय लिया।

अधिक उम्र में शादी होना, अनियमित दिनचर्या, शारीरिक श्रम का काम होना सिजेरियन प्रसव को बढ़ा रहा है। इसके अलावा अधिकांश लोग प्रसव की पीड़ा से बचने के लिए भी सिजेरियन प्रसव पर जोर देते हैं। - डॉ. अमृता चौरसिया, विभागाध्यक्ष, स्त्री रोग, एमएलएन मेडिकल कॉलेज
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