बवाल के डर से शहरी दिन भर सहमे रहे। कचहरी, कलेक्ट्रेट, विकास भवन, पीडब्ल्यूडी कार्यालय में तो दिन भर सन्नाटा पसरा रहा ही, कटरा और सिविल लाइंस की भी कई दुकानें दोपहर तक बंद रही। दोपहर बाद हालात सामान्य हो जाने के बावजूद कचहरी और कटरा के कुछ हिस्से की दुकानें नहीं खुलीं। बाजारों में रौनक सूरज ढलने के बाद ही आईं। लोग दहशत में रहे तो पुलिस भी खौफ दूर करने के लिए फ्लैग मार्च करती रही।
कचहरी के करीब स्थित मेरी वाना मेकर गर्ल्स इंटर कॉलेज, मेरी लूकस और बिशप जॉनसन स्कूल को बंद कर दिया गया था। मनमोहन पार्क से लेकर कटरा चौराहे के बीच की कई दुकानें ही खुली रहीं। बाकी लोगों ने बवाल के डर से दुकानें नहीं खोलीं। कचहरी से लेकर लक्ष्मी टॉकीज के बीच तो चाय, पान की दुकानें तक नहीं खुलीं। पुलिस की गश्त भी दिन भर होती रही। लक्ष्मी टॉकीज चौराहे से लेकर मेरी लूकस तक पुलिस ने बैरीकेडिंग भी कर रखी थी। कचहरी के आसपास का इलाका तो आरएएफ तथा पीएसी के हवाले रहा। अंधेरा हो जाने के बाद भी फोर्स में कमी नहीं की गई। कचहरी की किलेबंदी वकीलों की हड़ताल समाप्त होने तक बनी रह सकती है। कचहरी के आसपास रहने वालों को सवारी वाहन भी नहीं मिले। टेंपो, बस का संचालन कचहरी के आसपास बंद रहा। लोगों को सवारी गाड़ियों के लिए पैदल ही कई किमी चलना पड़ा।