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फिल्म ‘आर्टिकल-15’ के विरोध में बंद कराया बाजार

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Market closed in protest against 'Article-15' - फोटो : CITY DESK
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फिल्म ‘आर्टिकल-15’ के विरोध में बंद कराया बाजार
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प्रयागराज। क्षत्रिय समाज की ओर से फिल्म ‘पद्मावत’ के बाद अब ब्राह्मण समाज फिल्म ‘आर्टिकल-15’ के प्रदर्शन के विरोध में है। फिल्म में कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर आक्रोशित राष्ट्रीय परशुराम सेना की ब्रह्मवाहिनी की ओर से बृहस्पतिवार को भारत बंद के आह्वान के तहत सरदार पटेल मार्ग पर विरोध-प्रदर्शन के बीच दुकानें बंद कराई गईं।
फिल्म रिलीज न होने का विरोध करते हुए सुभाष चौराहे पर जुटे परशुराम सेना के कार्यकर्ता सरदार पटेल मार्ग के दोनों ओर की दुकानें बंद कराते हुए पीवीआर सिनेमाज तक गए, जहां पुलिस से उनकी झड़प भी हुई। चेतावनी देने के बावजूद पीछे न हटने पर कई थानों की फोर्स के साथ पहुंचे सीओ सिविल लाइंस ने उनकी गिरफ्तारी का आदेश दिया।
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गिरफ्तार होने वालों में राष्ट्रीय परशुराम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं.विमल तिवारी, प्रदेश सचिव अंकित द्विवेदी,जिला अध्यक्ष राघव त्रिपाठी, अनुज त्रिपाठी, विवेक त्रिपाठी, श्यामसूरत पांडेय आदि शामिल थे। बाद में पुलिस ने सभी को सिविल लाइंस थाने से छोड़ दिया। प्रदर्शन करने वालों में फूलचंद्र दुबे, अंकित दुबे, मनोज दुबे, जयवर्धन तिवारी, मनोज त्रिपाठी, साकेत पांडेय, सूरज तिवारी, अजय पांडेय, सौरभ शुक्ला, राहुल, मोहित, मनीष आदि शामिल थे।
दो सिनेमाज में होंगे आठ शो
विरोध-प्रदर्शन के बीच शुक्रवार को फिल्म आर्टिकल-15 दो सिनेमाज में प्रदर्शित होगी। पीवीआर में रोजाना पांच शो और कीडगंज स्थित कार्निवाल सिनेमाज (पायल और झंकार) में तीन शो होंगे। पैलेस थिएटर के प्रबंधक ललित श्रीवास्तव ने पहले ही फिल्म के प्रदर्शन से इनकार कर दिया था। वैसे फिल्म के वितरक ने भी इस सिनेमा को सिंगल स्क्रीन में देने से मना किया है। उधर, शहर के ज्यादातर सिनेमाघरों में फिल्म ‘कबीर सिंह’ चल रही है, जो दूसरे सप्ताह भी सिनेमाघरों में टिकी रहेगी।
चेतावनी, नहीं रिलीज होने देंगे फिल्म
राष्ट्रीय परशुराम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं.विमल तिवारी ने चेतावनी दी है कि फिल्म को किसी भी सूरत में सिनेमाघरों में रिलीज नहीं होने दिया जाएगा। उनका आरोप है कि उक्त फिल्म के माध्यम से ब्राह्मण समाज की छवि बिगाड़ने की कोशिश की गई है। इसमें ब्राह्मणों को दुष्कर्मी बताया गया है। फिल्म में जातिवाद को बढ़ावा देने के साथ-साथ जातियों में आपसी भेदभाव पैदा करने की कोशिश की गई है, जबकि ब्राह्मण समाज हमेशा समाज को एक सूत्र में बांधने का काम करता रहा है। ऐसे में परशुराम सेना फिल्म के रिलीज होने का विरोध करेगी।
जनमत
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पहली बात तो यह कि अपराध को जाति से जोड़कर कतई नहीं देखा जाना चाहिए। अपराध तो अपराध है, फिर अपराधी चाहे कोई भी हो, उसकी निंदा की जानी चाहिए। लेकिन, सबसे अहम बात यह कि समाज से लेकर फिल्मकार तक की यह जिम्मेदारी बनती है कि अपराध को ‘ग्लोरीफाई’ करने के बजाय उन पर अंकुश की कोशिश को उजागर करे।
0 प्रो.अनिता गोपेश, कथालेखिका
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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जरूरी है, ऐसा नहीं होगा तो समाज में फिर हिंसा और कट्टरपंथ बढ़ेगा। रचनात्मकता किसी भी लोकतांत्रिक समाज में संवाद की जगह बनाती है। इसे किसी भी तरह की विचारधारा या ताकत से रोका नहीं जाना चाहिए। रचना का जवाब रचना से ही दें तो बेहतर है।
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0 अंशु मालवीय, सामाजिक कार्यकर्ता
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किसी भी फिल्मकार को अपनी बात कहने का हक है लेकिन जरूरी है कि उसमें सच्चाई भी हो। अपराध को जाति से जोड़कर प्रस्तुत करने की मंशा दुर्भावनापूर्ण है, इससे सामाजिक सद्भाव बिगड़ता है।
0 फूलचंद्र दुबे
संगठन मंत्री, अखिल भारतीय ब्राह्मण सभा
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