प्रयागराज (अनिल सिद्धार्थ)। मराठों के आगमन और आक्रमण से पहले प्रयागराज की धरती पर छत्रपति शिवाजी के गुरु संत समर्थगुरु रामदास के पांव पड़े थे। बालपन में मां उन्हें नारायण सूर्याजीपंत कुलकर्णी कहकर बुलाती थीं। आरंभ से ही आध्यात्मिक प्रवृत्ति के नारायण, राम के अनन्य भक्त थे सो अपने को राम का दास बताने के कारण उनका नाम रामदास पड़ गया। मात्र चौबीस वर्ष की आयु में भारत भ्रमण पर निकले रामदास ने कश्मीर से कन्याकुमारी तक तकरीबन 1100 मठों, अखाड़ों की स्थापना की।