उन्होंने कहा कि पूजन और अनुष्ठान के लिए शास्त्रों में नियम और निर्देश स्पष्ट हैं। सभी सनातनियों को उनका पालन करना चाहिए। नियम का पालन किए बिना पूजन और अनुष्ठान का फल नहीं मिलता है। बता दें कि कुछ समय पहले लिए गए भक्तों के ड्रेस कोड के फैसले को भी इस बैठक में एक बार फिर स्पष्ट कर दिया गया। इसमें बताया गया कि पुरुषों को धोती पहनकर ही मंदिर में पूजन और अनुष्ठान करना होगा। धोती के साथ वे शर्ट और कुर्ता पहन सकते हैं।
इसी तरह महिलाओं को साड़ी या सलवार सूट पहनकर ही पूजन और अनुष्ठान करना होगा। पंडितों को भी धोती और कुर्ते में ही पूजा करानी होगी। भक्तों का ड्रेस कोड सावन में लागू होगा और आगे भी जारी रहेगा। इसके साथ ही बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि सभी पूजन और अनुष्ठान निर्धारित समय पर ही होंगे। इनके निरीक्षण के लिए मंदिर प्रशासन की ओर से एक व्यक्ति को नियुक्त किया जाएगा। बैठक का संचालन आचार्य विद्याकांत पांडेय ने किया। बैठक में पुजारी पंडित रामचंद्र शुक्ल, श्रीराम द्विवेदी, भीम पाठक, कमलेश द्विवेदी, रमेश पांडेय, दिलीप तिवारी, उदित त्रिपाठी, सुशील त्रिपाठी, आयुष तिवारी आदि मौजूद रहे।