इलाहाबाद। जमाखोरी के जरिये मुनाफा कमाने वाले सक्रिय हुए तो प्याज ने रुलाना शुरू कर दिया। थोक मंडी से बाहर आते ही प्याज की कीमत ढाई गुना तक बढ़ जा रही है। लोग परेशान हैं और प्रशासन मौन, ऐसे में जमाखोरी करने वाले चांदी काट रहे हैं। सब्जियों की फुटकर दुकानों पर प्याज के लिए मनमानी कीमत वसूली जा रही है। थोक में 20 रुपये किलो मिलने वाला प्याज फुटकर में 50 रुपये किलो के भाव से क्यों बिक रहा है, इसका जवाब किसी के पास नहीं।
थोक मंडी में छोटे प्याज का भाव 10 से 12 रुपये प्रति किलो ओर बड़े प्याज का भाव 18 से 20 रुपये प्रति किलो है। यानी खुदरा सब्जी व्यापारियों को प्याज इसी रेट पर मिल रहा है लेकिन खुदरा व्यापारी यही प्याज आम लोगों को 45 से 55 रुपये किलो के हिसाब से प्याज बेच रहे हैं। जमाखोरी खुलेआम की जा रही है। पिछले पांच दिनों में अचानक ऐसा क्या हुआ कि खुदरा बाजार में प्याज के भाव ढाई गुना तक बढ़ गए, इसकी वजह न तो थोक मंडी वाले जानते हैं और न ही खुदरा व्यापारियों के पास इसका कोई जवाब है। मंडी में प्याज की आवक भी पर्याप्त मात्रा में हो रही है। खुदरा बाजार में भी प्याज की कोई कमी नहीं, इसके बावजूद आम लोगों से प्याज के लिए मनमानी कीमत वसूली जा रही है।
जमाखोरी के खिलाफ कांग्रेसियों ने शनिवार को कलक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन किया और जिला प्रशासन को सलाह दी कि प्याज की कीमत को नियंत्रित नहीं कर सकते हैं तो इसे संग्रहालय में ही रखवा दिया जाए, क्योंकि इसका भाव अब आम लोगों की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। कांग्रेसियों ने सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन भी सौंपा। प्रदर्शन में कांग्रेस नेता हसीब अहमद और श्रीश चंद्र दुबे, डॉ. असलम, जितेंद्र मिश्र, महताब खां, सुजीत मिश्र, विजय निषाद, अजीत पासी, विजय श्रीवास्तव आदि शामिल रहे।
‘जमाखोरी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर कोई व्यापारी प्याज के लिए मनमानी कीमत वसूलते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।’
कौशल राज शर्मा, डीएम