ब्लॉक क्षेत्र में विकास कार्यों के नाम पर चल रहे भ्रष्टाचार की परतें शुक्रवार को तब खुलनी शुरू हुईं, जब तीन सदस्यीय जांच टीम मौके पर पहुंची। भुगतान पूरा दिखा दिए गए कई कार्य या तो ध्वस्त मिले या फिर कागजों में ही पूरे कर दिए गए।
ब्लॉक क्षेत्र में विकास कार्यों के नाम पर चल रहे भ्रष्टाचार की परतें शुक्रवार को तब खुलनी शुरू हुईं, जब तीन सदस्यीय जांच टीम मौके पर पहुंची। भुगतान पूरा दिखा दिए गए कई कार्य या तो ध्वस्त मिले या फिर कागजों में ही पूरे कर दिए गए। सबसे अहम बात यह रही कि शिकायत के केंद्र में रहीं ब्लॉक प्रमुख मांडा प्रगति सिंह जांच के समय मौजूद ही नहीं रहीं। कुखुड़ी गांव निवासी संजय यादव उर्फ कल्लू की शिकायत पर ग्राम विकास आयुक्त उत्तर प्रदेश के निर्देश के बाद मुख्य विकास अधिकारी प्रयागराज हर्षित सिंह ने परियोजना निदेशक भूपेंद्र सिंह, डीसी एनआरएलएम अशोक कुमार गुप्ता और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता की टीम गठित की थी।
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जांच टीम ने सबसे पहले मांडा खास स्थित कुष्मांडा वन चौकी के पास बने रपटा एवं सीसी कार्य का भौतिक सत्यापन किया। रपटा पूरी तरह ध्वस्त मिला। इसके बाद टीम बादपुर गांव पहुंची। यहां अच्छे सिंह के घर से बूढ़ेनाथ मंदिर तक सड़क के दोनों किनारों पर इंटरलॉकिंग कराया जाना था, लेकिन मौके पर कार्य अधूरा मिला। जबकि रिकॉर्ड में इसका भुगतान काफी पहले हो चुका था। निर्माण उस समय जारी मिला जब टीम अचानक निरीक्षण को पहुंची। इसी तरह महेवा कला गांव में कराए गए तालाब सुंदरीकरण कार्य में मानकों की जमकर अनदेखी सामने आई। तालाब किनारों पर की गई पिचिंग जगह-जगह धंसकर ध्वस्त हो चुकी थी, जिस पर परियोजना निदेशक ने मौके से ही कार्यदायी संस्था को फटकार लगाते हुए सुधार का निर्देश दिया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि ब्लॉक प्रमुख पिछले छह माह से ब्लॉक नहीं आतीं और किसी अनाधिकृत व्यक्ति से उनके नाम से हस्ताक्षर कराए जाते हैं। जांच के दौरान प्रमुख का न मिलना इस आरोप को और मजबूत कर गया। परियोजना निदेशक भूपेंद्र सिंह ने कहा कि जिन पांच कार्यों का निरीक्षण किया गया, उनमें खामियां स्पष्ट मिली हैं। जांच के दौरान भी ब्लॉक प्रमुख ब्लॉक पर मौजूद नहीं रहीं। रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।