कांग्रेस में इस बार भीड़ नहीं बल्कि समर्थकों की भीड़ टिकट दिलाएगी। टिकट के दावेदारों के समक्ष प्रशांत किशोर की टीम ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में पार्टी की जनसभाओं में जुटी भीड़ ही टिकट बंटवारे का पैमाना होगी। इस बार सिर्फ जमीनी कार्यकर्ताओं को टिकट देने में तरजीह दी जाएगी। पैराशूट से उतरकर टिकट मांगने वालों को कोई तवज्जो नहीं मिलेगी।
ठीक चुनाव के वक्त किसी बाहरी को पार्टी में शामिल करना और उसे टिकट दे देना राजनीतिक दलों में आम हो गया है। कांग्रेस की भी यही स्थिति है लेकिन इस बार पार्टी 27 साल बाद सत्ता में वापसी के लिए जी-जान से जुटी है। प्रदेश प्रभारी हो या प्रदेश अध्यक्ष का पद, हर जगह फेरबदल हो चुका है। दशकों बाद कांग्रेस ने चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी भी घोषित कर दिया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि सबकुछ प्रशांत किशोर की रणनीति के अनुरूप हो रहा है। टिकट बंटवारे में भी प्रशांत किशोर के सुझाव को ही तरजीह दी जाएगी। लखनऊ में 29 जुलाई को आयोजित राहुल गांधी के संवाद कार्यक्रम में शामिल होने वाले टिकट के सभी दावेदारों से कहा गया था कि वे अपने साथ कम से कम 30 कार्यकर्ता या समर्थक लेकर पहुंचे। नतीजा सामने है। कार्यक्रम में जबर्दस्त भीड़ जुटी।
यहां भी प्रशांत किशोर की रणनीति सफल रही। अब आगे भी इसी रणनीति पर काम होना है। कांग्रेस के जो भी कार्यक्रम होंगे, उसमें भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी टिकट के दावेदारों की होगी और जो दावेदार जितनी अधिक भीड़ लेकर पहुंचेगा, उसका दावा भी उतना मजबूत होगा। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता किशोर वार्ष्णेय का कहना है कि इस बार टिकट बंटवारे में जमीनी कार्यकर्ताओं और युवाओं को तरजीह दी जाएगी। जो दावेदार भीड़ जुटाकर और बूथों पर जनसंपर्क कर पार्टी को जितना मजबूत बनाएगा, वह टिकट की दौड़ में उतना ही आगे होगा।