बताया कि आज कल फैशन में कुछ महिलाएं बच्चों को स्तनपान नहीं कराती हैं। इससे भी ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा बढ़ा है। स्तन में दो प्रकार की गांठ होती हैं, एक कैंसर की और दूसरी फाइब्रोसिस्टिक की। फाइब्रोसिस्टिक की गांठ सामान्य होती है। छोटी सी सर्जरी के जरिए इसे ठीक किया जा सकता है।
कैंसर होने का एक कारण छोटी उम्र में किसी बीमारी के इलाज में रेडिएशन का हुआ प्रयोग भी है। इसके अलावा बढ़ती उम्र और परिवार में किसी को कैंसर की बीमारी होने पर भी इसका खतरा बढ़ जाता है। कार्यक्रम में विद्यालय की उप प्रधानाचार्य डॉ. राखी चौधरी, डॉ. स्नेह सुधा, डॉ. शानू केसरवानी, नीता गुप्ता, डॉ. पारुल श्रीवास्तव, सरोजबाला रावत, किरन कुमारी, लता, प्रीति श्रीवास्तव, नेहा सक्सेना आदि मौजूद रहीं।
समय-समय पर कराना चाहिए अल्ट्रासाउंड
छात्राओं को ब्रेस्ट कैंसर के बारे में जागरूक करते हुए डॉ. सोनिया तिवारी ने पीपीटी के माध्यम से इलाज और बचाव के तरीकों को भी समझाया। बताया, 20 की उम्र के बाद महिलाओं को समय-समय पर अल्ट्रासाउंड कराना चाहिए। सही समय पर ब्रेस्ट कैंसर का पता चलने पर उसका इलाज हो सकता है, लेकिन अगर यह चौथे स्टेेज पर है, तो इलाज में समस्या आ सकती है।