पोषक तत्वों, प्रोटीन और विटामिन की कमी के साथ ही नियमित स्वास्थ्य जांच न कराने से बच्चे कुपोषण के शिकार हो रहे हैं। बच्चों के माता-पिता में जानकारी का अभाव भी इसकी बड़ी वजह है। कुपोषण की वजह से बच्चों की शारीरिक संरचना के साथ ही बौद्धिक क्षमता भी प्रभावित होती है।
वहीं, सरकार की तरफ से कुपोषित बच्चों की स्क्रीनिंग उपचार तक की व्यवस्था की गई है। मगर जानकारी के अभाव में बच्चों के बीमार पड़ने के बाद उनके कुपोषित होने की जानकारी मिलती है।
तीन माह में 95 बच्चे हुए चिह्नित
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की ओर से अप्रैल से जून तक में करीब 95 कुपोषित बच्चे चिह्नित किए गए। इनमें लगभग 50 बच्चों को ओपीडी में दिखाया गया और 45 बच्चे एनआरसी वार्ड में भर्ती हुए।
एनआरसी के बेड रहते हैं खाली
एकीकृत बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों और आरबीएसके के कर्मचारियों को कुपोषित बच्चों को चिह्नित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
बेहतर इलाज के लिए कॉल्विन और चिल्ड्रेन अस्पताल में बच्चों के लिए 10-10 बेड के दो पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) की स्थापना की गई है। मगर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आरबीएसके के कर्मचारियों की लापरवाही के चलते दोनों वार्ड अधिकतर खाली ही मिलते हैं।
कुपोषण के लक्षण
बच्चों में कुपोषण के लक्षणों में बिना किसी डाइट के वजन कम होना, थकान और कमजोरी महसूस होना, चिड़चिड़ापन, भूख न लगना, बार-बार बीमार पड़ना, घावों का धीरे-धीरे ठीक होना और शारीरिक वृद्धि रुकना शामिल हैं। बच्चों के रूखे और पतले बाल, पेट या पैरों में सूजन आना भी लक्षण है।
केस-एक
भदोही निवासी संतोष के 11 महीने के बेटा अंश के सीने में जकड़न और बुखार थी। 10 जुलाई से चिल्ड्रेन अस्पताल में भर्ती है। जहां वजन और लंबाई नापने पर बच्चे में कुपोषण की पुष्टि हुई।
केस-दो
कौशाम्बी निवासी दिनेश को डेढ़ साल का बेटा आर्यन कई दिनों से सुस्त और बुखार से पीड़ित था। चिल्ड्रन अस्पताल में स्क्रीनिंग में कुपोषण की पुष्टि हुई।
केस-तीन
नैनी निवासी सोनू पाल की नौ महीने की जुड़वा बेटियां रिद्धि-सिद्धि को उल्टी व दस्त की शिकायत थी। दोनों को चिल्ड्रन अस्पताल लाया गया। वजन व लंबाई की स्क्रीनिंग के बाद उनमें कुपोषण की पुष्टि हुई। दोनों बेटियां 14 जुलाई से भर्ती हैं।
आरबीएसके की बैठक में इस बात को उठाया था कि एनआरसी वार्ड में आंगनबाड़ी केंद्रों और आरबीएसके के कर्मचारियों की ओर से कुपोषित बच्चों को रेफर नहीं किया जा रहा है। जिसके चलते बेहतर सुविधा होने के बावजूद वार्ड खाली है। - डॉ. एके चौधरी, प्रमुख अधीक्षक, कॉल्विन अस्पताल।
अस्पताल में स्क्रीनिंग होने के बाद ही बच्चों में कुपोषण की पुष्टि हो पाती है। गंभीर कुपोषण होने पर बच्चों को भर्ती किया जाता है। - डॉ. मनीषा मौर्या, विभागाध्यक्ष, चिल्ड्रन अस्पताल।