लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी लोक संगीत में नवाचार को जरूरी मानती हैं। उनका कहना है कि परंपरा से जुड़े रहकर मौलिकता को बचाते हुए ऐसा नवाचार मंचीय प्रस्तुति में दिखे जिससे उत्तर प्रदेश के लोक संगीत का पताका विश्व में लहराए।
लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी लोक संगीत में नवाचार को जरूरी मानती हैं। उनका कहना है कि परंपरा से जुड़े रहकर मौलिकता को बचाते हुए ऐसा नवाचार मंचीय प्रस्तुति में दिखे जिससे उत्तर प्रदेश के लोक संगीत का पताका विश्व में लहराए। कहा कि परंपरा को आगे चलाने के लिए युवा पीढ़ी को इससे जोड़ा जाए ताकि वे माटी की ताकत पहचानें। प्रयाग संगीत समिति के प्रेक्षागृह में आयोजित लोक संस्कृति उत्सव में आईं मालिनी अवस्थी ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि अपने प्रदेश का लोक संगीत ऐसा है कि अब पुरुषों के गीत महिलाएं गा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश के लोक साहित्य में जो विद्या नहीं तो फिर वह कहीं नहीं और समृद्ध भी नहीं है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि नवाचार में इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि धुनों और शब्दों में विकृति न आए, गीत का साहित्य और बोल न बदलें। लोक गीत-लोक संगीत के भाव मौलिक रहने चाहिए। हम जीवन, मरण, खुशी, गम आदि मौकों पर लोक गीत और संगीत के माध्यम से प्रस्तुतिकरण रोचक करने का नवाचार कर रहे हैं। जरूरी है कि लोक गीत और संगीत को युवाओं की पसंद का बनाया जाए। अपने प्रदेश में हम यह कर पा रहे हैं।
राम जन्म की बधाई संग बन्ना-बन्नी... पर झूमे श्रोता
मालिनी अवस्थी ने अपनी मंचीय प्रस्तुति में राम जन्म की बधाई के साथ बिटिया की विदाई के वक्त का लोक गीत बाबा निमिया के पड़े जिन काटेव, निमिया पे चिरइया का बसेरा... की प्रस्तुति पर खूब तालियां बटोरीं। उन्होंने पारंपरिक मुंडन, शादी के गीतों के साथ बन्नी-बन्ना आदि लोकगीतों से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।