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पैदा होते ही मौत बना रही गुलाम

Sat, 15 Aug 2015 01:43 AM IST
रजनीश मिश्र/अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद। देश भले अंग्रेजों के चंगुल से आजाद हो गया लेकिन आज भी देश में जन्म लेने वाले तमाम नवजात स्वतंत्रता का अहसास नहीं कर पाते हैं। जीवन मिलते ही मौत उन्हें अपना गुलाम बना लेती है। देश में आज भी पैदा होते ही नवजात को सड़क पर फेंक दिया जाता है। ज्यादातर मामलों में नवजातों की मौत हो जाती है और बच गए तो पूरा बचपन गिरते-पड़ते यूं ही बीत जाता है। बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न, बालश्रम जैसे मामले भी आए दिन सामने आ रहे हैं। ये बच्चे स्वतंत्र भारत में जन्म लेने के बाद जिंदगी भर गुलामी से भी बदतर जीवन जीने के लिए मजबूर हैं।
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नौ महीने तक मां की कोख में कैद रहने वाला नवजात जब आजाद हिंदुस्तान में जन्म लेता है तो सड़क किनारे या झाड़ियों पर फेंक दिया जाता है। इलाहाबाद की बात करें तो साल भर में दो दर्जन से अधिक नवजातों को सड़क या झाड़ियों पर फेंकने के मामले सामने आए। अगर पांच से दस साल के बच्चों की बात करें तो गैराज, दुकानों, होटलों में अक्सर इस उम्र के बच्चे काम करते नजर आ जाएंगे। भले ही उनके पैरों पर बेड़ियां न दिखें लेकिन हालत गुलाम जैसी होती है।

एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने इस साल अब तक 25 बंधक बच्चों को छुड़ाया है, जो होटलों और ढाबों पर काम करते पाए गए। आजाद भारत में बच्चों के प्रति अपराध सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं। आए दिन यौन शोषण के मामले सामने आ रहे हैं। ज्यादातर मामले सामाजिक कारणों से दबा दिए जाते हैं। इसके बावजूद इलाहाबाद में इस साल अब तक यौन शोषण के 14 मामले सामने आ चुके हैं। इस साल आठ किशोरों की हत्या और बच्चों के गायब होने के मामले भी सामने आए हैं। आजाद भारत में बच्चों के प्रति अपराध के ये आंकड़े गुलाम भारत को भी पीछे छोड़ चुके हैं।
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