योजनाओं में एक बड़ी कमी सड़कों को अलग-अलग विभागों को सौंपना था। कुछ सड़कें पीडीए को मिलीं तो कुछ नगर निगम को। शहर की जल निकासी प्रणाली को लेकर पीडीए के पास विशेषज्ञता नहीं थी। सड़क चौड़ीकरण के दौरान ड्रेनेज सिस्टम ध्वस्त हो गया। योजनाओं में सड़कों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग ठेकेदारों को निर्माण की जिम्मेदारी दी गई। ठेकेदारों के बीच समन्वय न होने के कारण सीवर लाइन की ढलान कहीं नीची तो कहीं ऊंची हो गई, जिससे सीवर का पानी उल्टा बहने लगा।
वरिष्ठ पार्षद शिवसेवक सिंह का आरोप है कि अधिकारियों ने इन परियोजनाओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। अरबों रुपये आते रहे और ठेकेदारों को जारी होते रहे। इंजीनियरों ने भी निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। इस लापरवाही के कारण शहर के निचले इलाकों में बड़े-बड़े प्रोजेक्ट विफल हो गए। इन सभी कारणों से जॉर्जटाउन में जलभराव की समस्या का समाधान नहीं हो पाया।