उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्ती प्रक्रिया में मानकों के पालन नहीं किए जाने और नियमों के उलंघन के खिलाफ बड़ी संख्या में प्रतियोगी छात्रों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल,मुख्यमंत्री को ई-मेल भेजकर अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की है। इन छात्रों ने सोशल मीडिया पर अपनी बात साझा करके आयोग की ओर से छात्रों के कैरियर के साथ खिलवाड़ का आरोप लगाया है।
भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व में छात्रों की ओर से भेजे गए ई-मेल में कहा गया है कि पीसीएस-2017 की मुख्य परीक्षा जून-जुलाई 2018 में पूरी होने के बाद अंतिम रूप से उनका अंकपत्र जारी नहीं किया गया, जबकि परीक्षा के एक वर्ष पूरे हो चुके हैं। परीक्षार्थियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से यूपीएससी के पैटर्न पर पीसीएस-2018 की मुख्य परीक्षा 17 जून से शुरू हो रही है और पीसीएस-2019 की परीक्षा 20 अक्तूबर 2019 को होनी है। छात्रों का कहना है कि यदि कोई अभ्यर्थी समय से रिजल्ट आने के बाद सेलेक्शन पा जाता तो उसे अगले वर्ष की परीक्षा में शामिल होने की आवश्यकता नहीं पड़ती। समय से परीक्षा होने पर छात्रों को आर्थिक एवं मानसिक हानि नहीं उठानी पड़ती। पत्र लिखने वाले छात्रों ने पीसीएस मुख्य परीक्षा-2018 की तिथि बदलकर उसे जुलाई के अंतिम सप्ताह में कराने की मांग की है।