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महर्षि वाल्मीकि अखाड़ा परिषद ने प्रधानमंत्री को भेजा खत, कहा- कृष्ण-सुदामा का रिश्ता भी निभाएं पीएम

Mon, 25 Feb 2019 11:18 PM IST
देव कश्यप अनूप ओझा, अमर उजाला, प्रयागराज
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अखिल भारतीय महर्षि वाल्मीकि अखाड़ा परिषद की बैठक - फोटो : अमर उजाला, प्रयागराज
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कुंभ में सफाई कर्मियों के पांव पखार कर वंचितों के दिलों में उतरने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अखिल भारतीय महर्षि वाल्मीकि अखाड़ा परिषद ने पत्र भेज कर कमजोरों का जीवन स्तर सुधारने का मुद्दा उठाया है। दलित संतों की उपेक्षा रोकने के लिए गठित वाल्मीकि अखाड़ा परिषद ने पीएम से भावुक सवाल किया है। कहा है कि, कृष्ण ने कभी सुदामा के पांव पखार कर राजपाठ दे दिया था, लेकिन आपने क्या दिया?

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दलित अखाड़े के महामंडलेश्वर मश्रीख शाह महाराज ने कहा है कि, सिर्फ पांव पखार देने से कुछ देर के लिए कलेजा चौड़ा तो हो सकता है, लेकिन देश में अन्न-वस्त्र के लिए मोहताज सफाईकर्मियों की भुखमरी दूर नहीं हो सकती। उनकी बेहतरी के लिए कदम उठाए जाने चाहिए।  

कुंभ में पहली बार संत समाज में व्याप्त गैर बराबरी और उपेक्षा के खिलाफ संप्रदायों, मतों और पंथों से जुड़े दलित संतों को एकजुट करने के लिए गठित इस अखाड़े ने सोमवार को सफाई कर्मियों के पांव पखारने के लिए पीएम का आभार भी जताया। वाल्मीकि साधु अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री सुनील राजदान का कहना है कि कुंभ में लगे 20 हजार से अधिक सफाई कर्मचारियों की जिंदगी को करीब से देखने की जरूरत है।
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पूर्वांचल से लेकर बुंदेलखंड तक के सफाई कर्मी कुपोषण के शिकार हो चुके हैं। इनमें से कई असमय गंभीर बीमारियों की चपेट में आकर काल कवलित भी हो रहे हैं। उनकी जिंदगी बिना पतवार की नाव बन चुकी है, क्योंकि उनके पास न तो धन है न धरती। वास्तव में अगर इन सफाई कर्मियों के जीवन में बदलाव लाना चाहते हैं तो स्वच्छ कुंभ के साथ ही स्वच्छ भारत की परिकल्पना को साकार करने वालों को स्थायी नौकरी और जमीनों के पट्टे का आवंटन किया जाए।

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बेहतरी की खास बातें

- कुंभ में लगे 20 हजार सफाई कर्मियों और उनके परिजनों को विशेष अभियान चलाकर स्थायी नौकरी दी जाए।
- ग्राम पंचायत की खाली पड़ी जमीनों पर इनके नाम पट्टा आवंटित किया जाए।
- सफाई कर्मियों व उनके आश्रितों को मुद्रा ऋण योजना के तहत लोन दिलाकर आत्म निर्भर बनाने की कोशिश हो।
- सफाई कर्मचारियों के बच्चों की पढ़ाई के लिए विशेष विद्यालयों की स्थापना कर उच्च शिक्षा प्रदान की जाए।
- गरीबी रेखा के तहत बीपीएल राशन कार्ड व अन्य सुविधाएं दी जाएं।

अखिल भारतीय महर्षि वाल्मीकि साधु अखाड़ा परिषद के महामंडलेश्वर मश्रीख शाह महाराज ने कहा कि, 'सफाई कर्मियों के पांवों को खुद पखार व तौलिये से साफ कर प्रधानमंत्री ने कमजोरों, दलितों का मान बढ़ाया है। इसके लिए उनका अखाड़े की ओर से हम हृदय से आभार प्रकट करते हैं, लेकिन जब तक सुविधाएं न मिलें तब तक बात बनती नहीं।'
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