अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और महाकुंभ मेला प्रशासन की बृहस्पतिवार को होने वाली बैठक के पूर्व निर्वाणी अखाड़े के श्रीमहंत धर्मदास द्वारा पद छोड़े जाने का निर्णय सभी के लिए चौंकाने वाला रहा। उनके पद छोड़ने के बाद निर्वाणी अखाड़े से श्रीमहंत मुरलीदास ही अब महाकुंभ की जिम्मेदारी उठाएंगे।
निर्वाणी अखाड़े के श्रीमहंत धर्मदास ने बुधवार को अपना पद छोड़ दिया। श्री राम जन्मभूमि आंदोलन के मुख्य पैरोकार रहे धर्मदास ने श्रीमहंत का पद दारागंज स्थित गंगा भवन में सर्वसम्मति से मुरलीदास को सौंप दिया। उनके पद छोड़ने के साथ ही लंबे समय से निर्वाणी अखाड़े में श्रीमहंत के पद को लेकर चल रहे गतिरोध पर विराम भी लग गया। इस दौरान नए श्रीमहंत मुरलीदास ने पद ग्रहण करने के बाद प्रयागराज में 100 कमरे बनवाने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि यहां अखाड़े की जमीन पर पक्का निर्माण कराया जाएगा।
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और महाकुंभ मेला प्रशासन की बृहस्पतिवार को होने वाली बैठक के पूर्व निर्वाणी अखाड़े के श्रीमहंत धर्मदास द्वारा पद छोड़े जाने का निर्णय सभी के लिए चौंकाने वाला रहा। उनके पद छोड़ने के बाद निर्वाणी अखाड़े से श्रीमहंत मुरलीदास ही अब महाकुंभ की जिम्मेदारी उठाएंगे। निर्वाणी अखाड़े में श्रीमहंत के पद को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। महाकुंभ मेले को लेकर हुई पिछली बैठक में महंत धर्मदास के बैठने को लेकर खासा विवाद भी हुआ।
इस विवाद के बाद अब बृहस्पतिवार को अखाड़ा परिषद और मेला प्रशासन की एक और बैठक होनी है लेकिन बैठक के पूर्व ही श्रीमहंत धर्मदास ने अपना पद छोड़ दिया। बताया जा रहा है कि बुधवार की सुबह वैष्णव संत मौजगिरि आश्रम पहुंचे। यहां अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि व जूना अखाड़े के अध्यक्ष महंत प्रेम गिरि की मौजूदगी में संतों में बातचीत चली।
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वार्ता के बाद सभी संत दारागंज स्थित गंगा भवन पहुंचे। वहां सर्वसम्मति से श्रीमहंत धर्मदास न अपना पद छोड़ दिया। इसके बाद महाकुंभ में तीनों वैष्णव अखाड़े से कौन से संत जिम्मेदारी संभालेंगे वह तय हो गया। निर्वाणी अखाड़े से श्रीमहंत मुरलीदास, श्रीमहंत मोहनदास, दिंगबर अखाड़े से श्रीमहंत राम किशोर दास, मंत्री वैष्णव दास एवं निर्मोही अखाड़े से श्रीमहंत राजेंद्र दास व श्रीमहंत रामजीदास जिम्मेदारी संभालेंगे।