भोजन में दाल-रोटी और दलिया
बाबा इंदर गिरि बताते हैं कि बीमारी के बाद से उनका खानपान बहुत संयमित हो गया है। वह रोटी-दाल और बिना मसाले की हरी सब्जी का सेवन करते हैं और नाश्ते में दलिया खाते हैं।
वर्ष 1986 में पहली बार हरिद्वार में हुए थे शामिल
बाबा ने बताया कि वर्ष 1986 में पहली बार हरिद्वार के कुंभ में शामिल हुए थे. उसके बाद से ही वह हर कुंभ में कल्पवास करने आते हैं। बीमारी के बाद से चार सालों से वह चल नहीं पाते हैं। ऐसे में शिष्य ही हर तरह से सेवा करते हैं और जहां जाना होता है, उन्हें उठाकर ले जाते हैं।