महाकुंभ को दिव्य, भव्य और नव्य बनाने में संगमनगरी के पंचम नायक कहे जाने वाले नागवासुकि की नक्काशी भी खास होगी। कसौटी के पत्थर से तैयार नागवासुकि की प्रतिमाएं हर किसी का मन मोहेंगी। इसी मंदिर परिसर में असि माधव को भी नव्यता प्रदान की जा रही है। पर्यटन विभाग की इस योजना को सीएम योगी ने 10 दिसंबर तक मूर्तरूप देने का निर्देश दिया है। नागवासुकि मंदिर के पुजारी पं.श्याम बिहारी मिश्र बताते हैं कि समुद्र मंथन के बाद सुमेरु पर्वत की रगड़ से नागवासुकि लहूलुहान हो गए थे। भगवान विष्णु के कहने पर उन्होंने प्रयागराज में इसी जगह विश्राम किया था। जनधारणा है कि नागवासुकि के दर्शन के बिना तीर्थराज प्रयाग की यात्रा पूरी नहीं हो पाती।