शिविर को तैयार करने के लिए यूपी, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश से 25 हजार से अधिक कारीगर आए हैं। बिहार के पूर्णिया से आए कारीगर शंभू का बताते हैं कि उनके राज्य के चार जिलों से सात हजार से अधिक श्रमिक कॉटेज लगाने का काम कर रहे हैं। शिविर की कुटिया, यज्ञशाला और एकांत साधना कक्ष के निर्माण के लिए बांस और सरपट के शिविरों की मांग अधिक है।
अखाड़ों में कॉटेज बना रहे रजत निषाद कहते हैं कि 15 दिनों के अंदर 32 कुटिया बनानी है। चार हजार हेक्टेयर में बसने वाले मेला क्षेत्र में इस बार 25 सेक्टर बनाए जा रहे हैं। हर सेक्टर में 400 से अधिक संस्थाएं बसाई जा रही हैं। दारागंज, हेतापट्टी, मलवा छतनाग, झूंसी में शिविरों का निर्माण करने के लिए कारीगरों की डिमांड ज्यादा है।