इन तीन विधियों से होगी गिनती
पहली विधि एट्रिब्यूट आधारित खोज होगी, इसमें पर्सन एट्रिब्यूट सर्च कैमरों के आधार पर ट्रैकिंग की जाएगी। दूसरी आरएफआईडी रिस्ट बैंड पर आधारित होगी। इसमें प्रमुख स्नान पर्वों के साथ महाकुंभ में प्रत्येक दिन आने वाले श्रद्धालुओं को रिस्ट बैंड प्रदान किए जाएंगे। पता चलेगा कि तीर्थयात्री ने मेला क्षेत्र में कितना समय बिताया, कितनी देर वह अंदर रहा और कितनी देर बाहर रहा। तीसरी विधि मोबाइल एप के द्वारा ट्रैकिंग की होगी, जिसमें तीर्थ यात्रियों की सहमति पर मोबाइल एप के जीपीएस के जरिये उनकी लोकेशन ट्रैक की जा सकेगी।
तड़के तीन से शाम सात बजे तक एक्टिव रहेगा सिस्टम
महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की गिनती के लिए कैमरे हर मिनट डाटा अपडेट करेंगे। पूरा फोकस घाट पर आने वाले श्रद्धालुओं पर होगा। यह सिस्टम तड़के तीन बजे से शाम सात बजे तक पूरी तरह एक्टिव रहेगा। यही स्नान का प्रमुख समय माना गया है। इससे पहले माघ मेला के दौरान भी इन विधियों का उपयोग किया गया था। इसके माध्यम से लोगों की संख्या का 95 फीसदी तक सटीक अनुमान लगाया जा सकता है।