महाकुंभ में संगम का यह स्थान गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम के लिए विख्यात है। महाकुंभ के अवसर पर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। अब तक 10 करोड़ से अधिक लोग यहां डुबकी लगा चुके हैं। देश-विदेश के लोग यहां अपनी मन्नतें पूरी करने और कुछ मन्नतें पूरी होने के बाद गंगा मैया को धन्यवाद देने आ रहे हैं।
मान्यता है कि संगम में स्नान करने से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं। संगम पर आए श्रद्धालुओं में से कई लोगों ने अपनी मन्नतें पूरी होने की कहानियां साझा कीं। बहराइच से आए प्रहलाद पाठक कहते हैं, मैंने पिछले कुंभ में यहां आकर मन्नत मांगी थी कि मेरे बेटे को नौकरी मिल जाए। उसे नौकरी मिल गई है। इसलिए मैं गंगा मैया को धन्यवाद देने आया हूं।
इसी तरह कानपुर से आईं पिंकी देवी बताती हैं, मैंने यहां अपने परिवार में एक बेटे और सुख-शांति के लिए प्रार्थना की थी। गंगा मैया ने मेरी सुन ली। मैं पूरे परिवार के साथ संगम स्नान करने आई हूं।
इस पवित्र स्थल पर न केवल भारत के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु आते हैं। संगम की पवित्रता और यहां के धार्मिक वातावरण का अनुभव करने के लिए बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी आते हैं।
कैसी-कैसी मन्नतें मांग रहे हैं लोग
स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना, संतान प्राप्ति, आर्थिक समृद्धि, व्यवसाय में सफलता, कर्ज से मुक्ति, शिक्षा और कॅरिअर, शांति और खुशहाली, पापों का प्रायश्चित, धार्मिक आस्था, मोक्ष और ईश्वर की कृपा के लिए मन्नतें मांगते हैं।
-अजय शर्मा, लखनऊ
मेरी सासू मां ने मन्नत मांगी थी, जो पूरी हो गई। अब वह बुजुर्ग हैं और उन्हें चलने-फिरने में परेशानी होती है। इसलिए हम लोग उन्हीं को लेकर आए हैं। हम यहां तक नंगे पांव चलकर आए हैं, क्योंकि गंगा मैया हम लोगों के पैरों को छूती हैं।
-सुनीता, दिल्ली
यहां आकर मैं समझी कि आस्था का असली मतलब क्या है। मैंने अपने पति और बच्चों के कॅरिअर में सफलता के लिए मन्नत मांगी है। साथ ही ये भी प्रार्थना की कि हमारे बच्चे अपनी मेहनत और ईमानदारी
से परिवार का नाम रोशन कर सकें।
- निशा चौधरी, झारखंड''
बताने से हिचकिचाते भी हैं लोग
हाकुंभ में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। हर किसी के दिल में मन्नत होती है। कोई स्वास्थ्य की कामना करता है, तो कोई सुख-शांति की। गंगा में डुबकी लगाते हुए हर व्यक्ति अपनी प्रार्थना गंगा मैया को अर्पित करता है। लेकिन मन्नतों को बताने में लोग अक्सर हिचकिचाते हैं। उनका मानना है कि मन्नतें बताने से उसका असर कम हो सकता है। यह हिचकिचाहट कहीं न कहीं उनके विश्वास और आस्था से जुड़ी होती है। महाकुंभ का यह अनोखा माहौल लोगों को न केवल जोड़ता है, बल्कि उनकी मन्नतों को पवित्रता का आभास भी कराता है।
मैं अपने परिवार के साथ आया हूं। मेरी इच्छा थी कि 144 साल बाद पड़ने वाले इस महाकुंभ में पूरे परिवार के साथ संगम में स्नान करूं। मेरी इच्छा गंगा मैया ने पूरी की। मैंने यहां प्रार्थना की है कि मेरा परिवार स्वस्थ रहे ताकि मैं अगली बार के कुंभ में फिर से आ सकूं।