निरंजनी अखाड़े में विज्ञाननंद गिरि और पुष्पाजंलि गिरि का पट्टाभिषेक किया गया।
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निरंजनी अखाड़ा छावनी में शनिवार को वैदिक कर्मकांड केे साथ ऑस्ट्रेलियाई संत समेत दो संतों को महामंडलेश्वर की पदवी दी गई। आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि की अगुवाई में विधि-विधान से पूजन-अर्चना के बाद दोनों को पदवी मिली।
अखाड़े छावनी में धर्म ध्वजा के नीचे पुकार के साथ धार्मिक संस्कार आरंभ हुए। निरंजनी पीठाधीश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि ने ऑस्ट्रेलियाई संत स्वामी विज्ञानानंद गिरि एवं साध्वी पुष्पांजलि गिरि (वृंदावन) का पट्टाभिषेक किया। निरंजन पीठाधीश्वर ने कहा संत का आध्यात्मिक जीवन साधना, आत्मज्ञान और सेवा से भरा होता है। वह जीवन में परमात्मा के साथ गहरी और सच्ची एकता स्थापित करने का प्रयास करते हैं।
अखिल भारतीय अखाडा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने कहा सनातन धर्म में आस्था का अत्यधिक महत्व है क्योंकि आस्था, केवल विश्वास का नहीं बल्कि व्यक्ति की आत्मा के स्तर पर होने वाली गहरी अनुभूति का प्रतीक होती है। आनंद पीठाधीश्वर स्वामी बालकानंद गिरि ने इसे एक एक अत्यंत महत्वपूर्ण और धार्मिक अवसर बताया।
अखाड़ा सचिव श्रीमहंत राम रतन गिरि, स्वामी प्रेमानंद पुरी, महामंडलेश्वर स्वामी निरंजन ज्योति, महंत ओमकार गिरि, महंत राधे गिरि, महामंडलेश्वर स्वामी महेशानंद, महंत दिनेश गिरि, महंत दर्शन भारती, महामंडलेश्वर स्वामी अन्नपूर्णा भारती ने चादर ओढ़ाने की रस्म पूरी की। पदवी मिलने के बाद दोनों संतों ने भगवान कार्तिकेय की कुटिया में पहुंचकर पूजन-अर्चन किया।
दशकों से ऑस्ट्रेलिया में रहकर कर रहेे सनातन का प्रचार
निरंजनी अखाड़े के नवनियुक्त महामंडेलश्वर स्वामी विज्ञानानंद गिरि पिछले करीब डेढ़ दशक से ऑस्ट्रेलिया में रहकर सनातन धर्म का प्रचार कर रहे हैं। अखाड़े ने विदेशों में उनकी सेवा एवं सनातन धर्म के प्रसार में योगदान के चलते यह पदवी उनको प्रदान की है।