योगी सत्यम से ली दीक्षा
उनके आहार-व्यवहार में तो बदलाव आया ही, देखते-देखते ही पूरा जीवन क्रियायोग साधना की भक्ति में रंग गया। बेटी में आए इस बदलाव को देखकर क्रिस्टीना के माता-पिता भी अचंभित हुए। अंतत: बेटी की खुशी के लिए उसे लेकर क्रियायोग आश्रम आ गए। क्रिस्टीना क्रियायोग अभ्यास की साधना में रमने के साथ ही योग गुरु योगी सत्यम से दीक्षा लेकर अब अमृता माता बन गई हैं।
अमृता माता महाकुंभ में महीने भर संगम के तट पर साधना करेंगी। उन्होंने क्रियायोग के रूप में सनातन धर्म को स्वीकार कर लिया है। वह बताती हैं कि सनातन संस्कृति से श्रेष्ठ उनकी नजर में विश्व में कोई संस्कृति नहीं है। उनका कहना है कि क्रियायोग के निरंतर अभ्यास के जरिए मन और शरीर के विकार से मिटते ही हैं, किसी भी तरह की बीमारी भी दूर हो सकती है।
क्रिस्टीना का मां उनको लेकर यहां आश्रम में आईं। मां ने ही अपनी बेटी के जीवन में आए बदलाव के बारे में जानकारी दी और अपनी बेटी की खुशी के लिए आश्रम में ही उनको दीक्षा देने का आग्रह किया। - योगी सत्यम, अध्यक्ष, क्रियायोग आश्रम एवं अनुसंधान संस्थान