अजय कुमार द्विवेदी ने 23 जनवरी 2023 को जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी प्रदीप कुमार सिंह, सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी राजेश कुमार, सेवानिवृत्त प्रधान सहायक प्रमोद कुमार, प्रशासनिक अधिकारी आत्म प्रकाश व कनिष्ठ सहायक राकेश कुमार केसरवानी दोषी पाए गए। हालांकि, इसके बाद भी फाइल इधर-उधर घूमती रही।
अगर फाइल को दबाया न गया होता तो यह कार्रवाई आठ साल पहले हो जानी चाहिए थी। जब भगवती सिंह यूपी बोर्ड के सचिव बने तो उनके सामने भी यह फाइल आई। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह फाइल तत्काल निदेशालय भेज दी। वहीं, माध्यमिक शिक्षा निदेशक महेंद्र देव के 10 अगस्त 2024 के आदेश पर पांचाें दोषियों के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज करा दी गई।
यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी आत्म प्रकाश व कनिष्ठ राकेश कुमार केसरवानी के खिलाफ निलंबन से लेकर बर्खास्तगी तक की कार्रवाई की जा सकती है। जल्द इस पर निर्णय लिया जाएगा। वहीं, सेवानिवृत्त हो चुके वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी प्रदीप कुमार सिंह, प्रशासनिक अधिकारी राजेश कुमार व प्रधान सहायक प्रमोद कुमार के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को संस्तुति भेजी जाएगी।