आरती बात करते हुए जितनी उत्साहित नजर आई उससे उसके काम करने की क्षमता का भी अंदाजा लग गया। उसने बताया कि उसे ये काम करना पसंद है और इससे कुछ पैसे भी मिल जाते हैं जो घर के काम आ जाते हैं। मैंने पूछा आपको इस काम के किस प्रकार से पैसे मिलते हैं? इस पर आरती का कहना था कि हमें तो ठेकेदार ने यह काम दिया है। हमें 15 रुपये प्रति स्क्वायर फीट के हिसाब से पैसे मिलते हैं। मैंने उससे अगला सवाल किया कि वो दिनभर में कितने रुपये का काम कर लेती है। इस पर उसका उत्तर था लगभग 1000 रुपये तक का। इसके साथ ही उसने बताया कि वो प्रयागराज की ही रहने वाली है। उसे कुंभ का मेला बहुत अच्छा लगता है। मैंने उससे पूछा कि यह जो कलर आपको दिए गए हैं ये कहां से आते हैं? इस पर आरती का कहना था कि ये उन्हें ठेकेदार देते हैं। ये ऐसे कलर हैं कि इनको एक दो साल तक कुछ नहीं होगा।
प्रयागराज में इस समय देशभर से आए कलाकार दिन-रात सनातन धर्म से जुड़े प्रतीकों को दीवारों पर उकेर रहे हैं। 10 लाख स्क्वायर फीट से भी बड़े क्षेत्र में महाकुंभ-2025 के लिए पेंटिंग्स तैयार की जा रही हैं। फाइन आर्ट्स के स्टूडेंट्स के अलावा कुछ मूक-बधिर युवा भी दीवारों को रंगीन बनाने का काम कर रहे हैं। जब आप प्रयागराज में आते हैं तो भगवान नटराज की विभिन्न मुद्राएं भी आपको नजर आ जाएंगी। वर्ष 2019 में अर्द्ध कुंभ के दौरान भी हजारों छात्रों, आम नागरिकों और पेंटर्स ने 8 घंटे तक लगातार वॉल पेंटिंग पर हाथों के रंग-बिरंगे छाप से 'जय गंगे' थीम की पेंटिंग बनाई थी, जो गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ था।