नव्य, दिव्य और भव्य महाकुंभ इस बार सनातन के लिए कई मायनों में खास होगा। एक तरफ जहां देश भर की संस्कृतियों का मिलन हो रहा है, वहीं धर्म संसद भी महाकुंभ प्रयागराज की धरती पर होगा। महाकुंभ में पहली बार चार धर्म संसद एक साथ चलेगी। इसमें गो, सनातन, हिंदू राष्ट्र के साथ ही काशी और मथुरा की मुक्ति पर भी अंतिम निर्णय होगा। सनातनियों के लिए धर्मादेश के साथ ही सनातन बोर्ड के गठन पर भी सहमति बनेगी। महाकुंभ की सभी धर्म संसद का मकसद हिंदू धर्म की रक्षा करना है।
महाकुंभ में पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद की धर्मसभा, ज्योतिष्ठपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की परम धर्म संसद, कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर और स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती की धर्म संसद साथ-साथ चलेगी। पुरी के शंकराचार्य की धर्म संसद में हिंदू राष्ट्र, ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य की परमधर्म संसद में गाय को राष्ट्रमाता, देवकी नंदन ठाकुर की धर्मसंसद में सनातन बोर्ड, स्वामी नरेंद्रानंद की धर्म संसद में ज्ञानवापी मुक्ति और श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास की धर्म संसद में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति पर चर्चा होगी। अखाड़ों के साथ कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर ने 27 जनवरी को होने वाली धर्म संसद के लिए देश भर में अभियान चला रखा है।
धर्म संसद में चारों पीठ के शंकराचार्य, 13 अखाड़े और देश भर के संत-महात्मा शामिल होंगे। सभी की राय से सनातन बोर्ड के गठन पर अंतिम निर्णय होगा। इसका मसौदा तैयार करके सरकार को भी भेजा जाएगा। धर्म संसद से जुड़ने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। मेला क्षेत्र के सेक्टर 17 स्थित देवकी नंदन ठाकुर के शिविर में धर्म संसद के जरिये सरकार पर इस बात का दबाव बनाया जाएगा कि जल्द से जल्द सनातन बोर्ड का गठन हो और सनातनियों को उनके पुराने मठ-मंदिर वापस मिल सकें। धर्म संसद के तहत ही स्वामी रामभद्राचार्य के शिविर में पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) को मुक्त कराने के लिए अनुष्ठान भी होगा। 250 हवनकुंडों में पीओके की मुक्ति के लिए आहुतियां अर्पित की जाएंगी।
इस्लामिक जिहाद व हिंदू राष्ट्र पर मंथन
पुरी पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के शिविर में चल रही धर्म सभा में हिंदू राष्ट्र के निर्माण के साथ ही सनातनियों के आचरण पर मंथन चल रहा है। पुरी पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का कहना है कि हिंदू राष्ट्र का संकल्प अवश्य पूर्ण होगा। जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद सरस्वती 25 जनवरी को संत-संवाद करेंगे। विश्व हिंदू परिषद के शिविर में 25 जनवरी को संत सम्मेलन होगा। इसमें इस्लामिक जिहाद के खतरे पर मंथन और देश को सनातन वैदिक राष्ट्र बनाने के लिए भी मंथन होगा। सनातन धर्म के सभी अखाड़े, पंथ और संप्रदाय के धर्मगुरुओं व हिंदू संगठनों के प्रमुख कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया गया है।
संसद की तर्ज पर ही होती है धर्म संसद
सनातन धर्म में पुरातन काल से धर्म संसद के आयोजन होते रहे हैं। कुंभ या महाकुंभ में धर्म संसद के जरिये सनातन धर्म के लिए निर्णय लेते हैं और इसे पूरे देश में लागू कराया जाता है।
- देश की संसद की तर्ज पर लोकतांत्रिक तरीके से सभी अपने विचार रखते हैं और आम सहमति के बाद धर्मादेश जारी किया जाता है। धर्म संसद का मसौदा सरकार को भी भेजा जाता है।
- शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती की धर्मसभा में हिंदू राष्ट्र पर मंथन।
- अविमुक्तेश्वरानंद की परमधर्मसंसद में गाय को राष्ट्रमाता बनाने के साथ ही 27 मुद्दों पर होगा परमधर्मादेश।
- देवकी नंदन ठाकुर की धर्म संसद में सनातन बोर्ड के गठन पर मंथन।
- नरेंद्रानंद सरस्वती की धर्म संसद में ज्ञानवापी की मुक्ति के लिए आह्वान होगा।
- श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास की धर्म संसद में जन्मभूमि मुक्ति के लिए।
परम धर्मसंसद में 27 दिनों में जारी होंगे 27 परमधर्मादेश
ज्योतिष्पीठ के शिविर में परम धर्म संसद शुरू हो चुकी है। 27 दिनों तक चलने वाली धर्म संसद में गाय को राष्ट्रमाता बनाने के साथ ही 27 मुद्दों पर परमधर्मादेश जारी किया जाएगा। देश की संसद की तर्ज पर ही धर्म संसद को तैयार किया गया है। गोलाकार मंडप में परम धर्म संसद का संचालन होता है। सबसे ऊंचे स्थान पर शंकराचार्य बैठते हैं और उनके सामने धर्म सांसद बैठकर हर दिन सनातन के मुद्दों पर चर्चा करते हैं और अंत में परमधर्मादेश जारी होता है। धर्म संसद में देश भर से 1008 प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।
- अभी तक परम धर्म संसद ने हिंदू शब्द, साईं और संतोषी माता की पूजा ना करने का परमधर्मादेश जारी किया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का कहना है कि जब तक गाय को राष्ट्रमाता घोषित नहीं किया जाएगा, तब तक उनका यह अभियान जारी रहेगा।
विदेश से भी आ रहे सदस्य
महाकुंभ में काशी और ज्ञानवापी की मुक्ति के लिए भी मंथन होगा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास की ओर से 23 जनवरी को विराट धर्म संसद सेक्टर 19 में होगी। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर केस के मुख्यवादी पं. दिनेश शर्मा के निर्देशन में आयोजित धर्म संसद में मथुरा की मुक्ति का आह्वान होगा। इसमें देश भर के सदस्यों के साथ ही विदेश से भी सदस्य आ रहे हैं। इसके अलावा स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती की ओर ज्ञानवापी की मुक्ति के लिए अपने शिविर में धर्म संसद का आयोजन होगा। शिविर में ज्ञानवापी के मॉडल के जरिये आम जनता को जागरूक किया जा रहा है।