महाकुंभ से पहले भी कई लोगों ने इस तरह से अपनी जटाएं बनवाईं। वहीं, जिन साधुओं की जटाएं बेतरतीब हो जाती हैं, वह इन्हें सुधरवाने के लिए भी यहां आते हैं।
आठ हजार से डेढ़ लाख रुपये तक का खर्च
कृत्रित जटाएं बनवाने में आठ हजार रुपये से डेढ़ लाख रुपये तक खर्च होते हैं। इनको तैयार करने में कैनाकुलर का इस्तेमाल होता है, जो काफी महंगा होता है। खास तकनीक का इस्तेमाल करके इसे जटा का स्वरूप दिया जाता है। एक बार जटा बनने के बाद इनको दोबारा खोलने में भी मेहनत करनी पड़ती है।
चार फीट से लेकर 17 फीट तक लंबी जटाएं बनवाई जा सकती हैं। लंबाई के हिसाब से ही पैसे भी लगते हैं। युवा साधु भी अपनी जटाएं बनवाने के लिए इसका सहारा लेते हैं। किन्नर अखाड़े में भी इसी तकनीक के सहारे कई ने अपनी जटाएं बनवाई हैं।