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Mahakumbh 2025: बनावटी जटाओं का है जलवा... इसके लिए खर्च हो रही मोटी रकम; कई ने कृत्रिम जटाओं का लिया सहारा

Wed, 29 Jan 2025 03:46 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

कुंभनगरी में इस बार बनावटी जटाओं का जलवा है। इसके लिए मोटी रकम खर्च हो रही है। कई साधुओं ने कृत्रिम जटाओं का सहारा लिया है।
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Mahakumbh 2025 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इंफ्लुएंसर हर्षा रिछारिया समेत कई युवा साधु और साध्वी अपनी कई मीटर लंबी जटाओं की वजह से कुंभनगरी में आकर्षण का केंद्र हैं, लेकिन हकीकत में उनकी यह जटाएं बनावटी हैं। युवाओं में इसका क्रेज दिख रहा है। कुंभनगरी में भी लोग कृत्रिम जटाएं लगवाने आ रहे हैं, हालांकि यह काफी खर्चीला है। इनको लगवाने में मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है। 

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कई साधुओं ने कृत्रिम जटाओं का लिया सहारा 
सनातन धर्म में जटाओं को साधुओं की तपस्या का प्रतीक माना जाता है। वर्षों की तपस्या के दौरान बालों की देखरेख न होने से जटाएं बन जाती हैं। इनको सघन करने में बरगद के दूध का भी इस्तेमाल होता है। बाल कटवाने की मनाही होने से धीरे-धीरे यह जटाएं लंबी हो जाती हैं। 

यह जटाएं ही तपस्वी की पहचान बन जाती हैं, लेकिन अब ऐसी जटाएं महज तीन घंटे में भी बनवाई जा सकती हैं। कृत्रिम जटाएं बनाने का केंद्र संचालित करने वालीं उज्जैन की एलिजा बाई बताती हैं कि यह तकनीक जापान, फ्रांस, इंग्लैंड जैसे देशों में पहले से थी। 
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कई हॉलीवुड कलाकारों समेत विदेशी गायकों ने भी इस तरह से अपने बालों को लुक दिया। अब धीरे-धीरे भारत में भी लोग इसे पसंद कर रहे हैं। सबसे ज्यादा दिलचस्पी युवाओं में है। 

महाकुंभ से पहले भी कई लोगों ने इस तरह से अपनी जटाएं बनवाईं। वहीं, जिन साधुओं की जटाएं बेतरतीब हो जाती हैं, वह इन्हें सुधरवाने के लिए भी यहां आते हैं। 

 

आठ हजार से डेढ़ लाख रुपये तक का खर्च 
कृत्रित जटाएं बनवाने में आठ हजार रुपये से डेढ़ लाख रुपये तक खर्च होते हैं। इनको तैयार करने में कैनाकुलर का इस्तेमाल होता है, जो काफी महंगा होता है। खास तकनीक का इस्तेमाल करके इसे जटा का स्वरूप दिया जाता है। एक बार जटा बनने के बाद इनको दोबारा खोलने में भी मेहनत करनी पड़ती है।
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चार फीट से लेकर 17 फीट तक लंबी जटाएं बनवाई जा सकती हैं। लंबाई के हिसाब से ही पैसे भी लगते हैं। युवा साधु भी अपनी जटाएं बनवाने के लिए इसका सहारा लेते हैं। किन्नर अखाड़े में भी इसी तकनीक के सहारे कई ने अपनी जटाएं बनवाई हैं।
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