चैत्र नवरात्र में बृहस्पतिवार को भगवती के आठवें स्वरूप महागौरी के पूजन-अर्चन को शहर के शक्तिपीठों में भक्तों की भीड़ रही। यश, बल, समृद्धि और विद्या के लिए भक्तों ने मां से आशीष मांगा। मंगला आरती के साथ मंदिरों के पट खुले। घरों में दुर्गा सप्तशती के पाठ के बाद हवन और आरती की गई। मां भगवती के भजन और गीत सुबह से लेकर देर रात तक मंदिरों में बजते रहे। सिद्धपीठों में मां भगवती का विशेष शृंगार किया गया।
सिद्धपीठ ललिता देवी मंदिर में घंटा-घड़ियाल, शंख की मंगल ध्वनि के साथ त्रिपुर सुंदरी ललिता का महागौरी स्वरूप में पूजन अर्चन किया गया। देवी सोने चांदी के आभूषणों और फूलों से सजीं। मंदिर परिसर में कन्याएं पूजी गईं। मंदिर समिति के अध्यक्ष हरिमोहन वर्मा और महामंत्री धीरज नागर सहित पीसी वर्मा, महेंद्र मालवीय, सत्येंद्र सिंह, संजय उपाध्याय, दिलीप केसरी, सुमित श्रीवास्तव, उमेश मिश्र, विपिन, अनुराग, अनूप, अंकित, सुरजीत, रत्नेश आदि व्यवस्था में जुटे रहे।
कल्याणी देवी मंदिर में मां का सोने चांदी के आभूषणों और बेला, गुलाब के फूलों से मां को सजाया गया। अध्यक्ष सुशील पाठक, व्यवस्थापक श्याम जी पाठक की देखरेख में गर्भगृह को फलों एवं सब्जियों से सजाया गया। मंदिर परिसर में दुर्गा सप्तशती का पाठ, मुंडन छेदन कराने वालों का जमावड़ा लगा रहा है। अलोपी देवी मंदिर में भक्त फूल, माला, नारियल और पूजन सामग्री लेकर पहुंचे। मुट्ठीगंज कालीबाड़ी में पुष्पांजलि के बाद विशेष हवन एवं पूजा अनुष्ठान हुआ। सिद्धेश्वरी गुप्त महापीठ, कर्नलगंज व कटरा कालीबाड़ी, चौफटका, समियामाई, हनुमत निकेतन के दुर्गा मंदिर, हाईकोर्ट हनुमान मंदिर के अष्टभुजी मंदिर, मुट्ठीगंज कालीबाड़ी, सहित देवी के विभिन्न मंदिरों में पूजन अर्चन को भक्त पहुंचे।
पूजीं गईं कन्याएं
सिद्धिपीठों, मंदिरों और घरों में कन्या पूजन किया गया। कन्याओं के पांव पखारकर उनकी आरती उतारी गई। रोली टीका करके भोजन कराया गया। कन्याओं को उपहार भी दिए गए।