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महाकुंभ: विदेशी युवतियों पर भी चढ़ा भक्ति का रंग, पीठ पर बुजुर्ग मां को सवार कर संगम स्नान कराने पहुंचे जगदीश

Tue, 31 Dec 2024 05:41 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज

सार

महाकुंभ की प्रारंभ जल्द ही होने वाला है, लेकिन इस बीच भक्ति के ऐसे रंग देखने को मिल रहे हैं जो सभी को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। देश में जहां आस्था का चरम देखा जा रहा है वहीं इसके प्रभाव से विश्व भी अछूता नहीं है। इसकी दो ऐसी कहानी जो आपको सोचने पर मजबूर कर देंगी।
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महाकुंभ 2025 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विदेशी युवक-युवतियां संगम की रेती पर भगवा चोला रंगाकर संन्यास धारण कर रहे हैं। इसे गेरुआ वस्त्र का ग्लैमर कहें या माया मोह का परित्याग। महाकुंभ में संन्यास ग्रहण करने में विदेशी युवाओं के साथ युवतियां भी पीछे नहीं हैं। सोमवार को जूना अखाड़े की छावनी में कई विदेशी युवक-युवतियों ने भगवा चोला रमाया और अब वह महीने भर संगम की रेती पर जप-तप, ध्यान करेंगे। जूना अखाड़े में 29 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन दुनिया के कई देशों की महिलाएं संन्यास धारण करेंगी। 
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इसके लिए जूना अखाड़े के माईवाड़ा में तैयारियां शुरू हो गई हैं। पर्चियां कटवाई जा रही हैं। पंच गुरुओं के नाम तय किए जा रहे हैं। महिलाओं को संन्यासिनी बनाने के पांच संस्कार पूरे किए जाएंगे। महाकुंभ में प्रथम डुबकी से पहले ही संन्यास धारण करने वाली अमेरिका की क्रिस्टिना अब आनंद लीला माता बनकर ध्यान-साधना कर रही हैं। वेद अध्ययन के लिए इटली से आईं तारा भी संन्यासिनी बन गई हैं। तारा गेरुआ वस्त्र में घंटों साधना रत रहती हैं। इनके अलावा ऑस्ट्रिया की एदा, जर्मनी की बर्नियर सुईट समेत आधा दर्जन से अधिक महिलाओं ने गेरुआ वस्त्र रंगा लिया है। पंच गुरुओं की ओर से दीक्षा लेने वाली यह संन्यासिनियां सनातन संस्कृति के रंग में महाकुंभ में देश-दुनिया से आने वाले संतों भक्तों का ध्यान खींच रही हैं।

जूना अखाड़े की चार मढ़ी की महंत लक्ष्मी सरस्वती बताती हैं कि जिन विदेशी युवतियों ने संन्यास ग्रहण किया है, वह पिछले कई महीने या वर्ष भर से अपने गुरुओं के सानिध्य में वैरागी जीवन जी रही थीं। वह किसी न किसी गुरु की शिष्या के रूप में अपने देश में रहकर सनातन संस्कृति के रूप में अखाड़े की परंपरा का निर्वाह करती आ रही हैं। 
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पीठ पर बुजुर्ग मां को सवार कर संगम स्नान कराने पहुंचे जगदीश
त्रेतायुग में श्रवण कुमार अपने बूढ़े मां-बाप को कंधे पर सवार कर चारधाम की यात्रा पर निकले थे। ठीक उसी प्रकार अब कलयुग में कुमार जगदीश अपनी 85 वर्षीय वृद्ध मां को पीठ पर लादकर संगम स्नान कराने पहुंचे थे। डिंडोरी जिला मध्य प्रदेश से महाकुंभ मेला क्षेत्र पहुंचे जगदीश ने बताया कि 12 वर्ष पूर्व मां को दिया वचन पूरा करने के लिए वो आए हैं। साथ ही संगम की रेती साथ लेकर विदा हो रहे हैं।

दो बच्चे और पत्नी के साथ मेला क्षेत्र में भ्रमण के दौरान उन्होंने बताया कि पिता का देहांत होने के बाद उन्होंने मां को वचन दिया था कि महाकुंभ में संगम स्नान कराऊंगा। उन्होंने कहा कि इच्छा तो शाही स्नान और अन्य पर्वों तक रुकने की थी, लेकिन मां की अस्वस्थता के कारण असमर्थ हूं। मां और परिवार सहित संगम स्नान और दान पुण्य आदि करने के बाद उन्होंने बंधवा स्थित बड़े हनुमान मंदिर में दर्शन पूजन किया और फिर वापस घर के लिए रवाना हो गए। जाते-जाते वो संगम की रेती भी माथे पर लगाकर अपने साथ ले गए।
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