महामना पंडित मदन मोहन मालवीय को ‘भारत रत्न’ देेने की घोषणा के बाद अब उसे स्वीकार करने के मामले को लेकर परिजनों ने अपने-अपने तर्क और दावे पेश किए हैं। हालांकि इससे जुड़े दोनों ही पक्षों ने सीधे तौर पर कुछ भी कहने से इनकार किया लेकिन बातचीत में उन्होंने अपनी मंशा जाहिर की है। महामना के सबसे बड़े बेटे की पुत्रवधू 92 वर्षीया सरस्वती मालवीय ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर महामना को भारतरत्न दिए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया है लेकिन पत्र के साथ परिवार की वंशावली भी ‘अटैच’ करके उन्होंने अपना परिचय भी दिया। छोटी बेटी रंजना मालवीय की मदद से उन्होंने इतना जरूर कहा कि सम्मान दिए जाने के मौके पर महामना के परिवार से जुडे़ सभी सदस्यों को आमंत्रित किया जाता तो अच्छा लगता। वैसे यह सम्मान बीएचयू को ही सौंप दिया जाएगा।
इससे पहले उन्हें यह मलाल भी रहा कि महामना को भारतरत्न की सूचना भी सरकार ने नहीं दी बल्कि संचार माध्यमों से मिली। कहा, महामना के सबसे बड़े बेटे पंडित रमाकांत मालवीय के सबसे बड़े बेटे पंडित श्रीधर मालवीय की पत्नी और महामना की बड़ी पुत्रवधू होने के नाते वह परिवार में सबसे बड़ी हैं। महामना ने अपनी वसीयत के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी पंडित रमाकांत मालवीय को दी थी लेकिन उनके न रहने पर उन्होंने अपने जीवनकाल में ही पंडित रमाकांत के बेटे पंडित श्रीधर मालवीय (सरस्वती मालवीय के पति) को यह जिम्मेदारी दे दी।
वहीं महामना के पौत्र न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय ने कहा, इस मुद्दे को लेकर परिवार में किसी तरह की कोई बात नहीं है। यह महामना का सम्मान है। मुझे नहीं पता कि कब और किसे दिया जाएगा। यदि मुझे बुलाया जाता है या परिवार के सदस्यों के बारे में पूछा जाता है तो मैं सभी का नाम बताऊंगा और पूरे परिवार को ले चलने की बात कहूंगा। महामना के सम्मान को बीएचयू के संग्रहालय में ही रखा जाएगा ताकि दुनिया भर के लोग उसे देख सकें। वैसे यदि सबसे बड़े की बात की जाय तो 95 वर्षीया बहन हेम शर्मा परिवार में सबसे बड़ी हैं।