हिंदू सिर्फ पेट और परिवार तक सीमित न रहें। अपने धर्म की रक्षा के लिए भी जागरूक हों। युवा पीढ़ी श्रीमद्भभगवद्, महाभारत और श्री रामचरित मानस जैसे अमूल्य ग्रंथों के अध्ययन की मानसिकता विकसित करे। हिंदुओं को अपने धर्म की रक्षा के लिए जागना होगा, ताकि नई पीढ़ी को अपने धर्म की जानकारी हो। यह बातें गोवर्धनमठ पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने रविवार को माघ मेले के त्रिवेणी मार्ग स्थित शिविर में धर्म अध्यात्म एवं राष्ट्र से संबंधित भक्तों के प्रश्नों के उत्तर में कहीं।
पौष पूर्णिमा, मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और वसंत पंचमी जैसे प्रमुख स्नान पर्वों की महत्ता बताते हुए पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि विशेष संयोग से प्रमुख स्नान पर्व पड़ते हैं। गंगा नाम के स्मरण से ही मानव का कल्याण होता है। प्रमुख स्नान पर्वों पर तीर्थराज प्रयागराज में कहीं भी गंगा घाट पर स्नान करना पुण्यदायक होता है।
संगम के दर्शन से ही दिव्यता का होता है अनुभव
शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने कहा कि जो व्यवहार अपने लिए उचित न लगे वो दूसरों के साथ भी नहीं करना चाहिए। पर्यटन केंद्र समझकर किसी भी तीर्थ क्षेत्र में नहीं जाना चाहिए। संगम के दर्शन से ही दिव्यता का अनुभव होता है। सनातन धर्म को चाहे कोई कितना भी क्षति पहुंचाने की चेष्टा करे लेकिन सनातन धर्म अजेय और सिद्ध है। इस मौके पर शंकराचार्य के निजी सचिव स्वामी निर्विकल्पानंद सरस्वती, विवेक मिश्र वृंदावन, प्रफुल्ल चैतन्य ब्रह्मचारी, हृषिकेश ब्रह्मचारी और राजेश चैतन्य ब्रह्मचारी आदि मौजूद रहे।