माघी पूर्णिमा का स्नानपर्व मंगलवार को है और इस पर श्रद्धालुओं को स्नान के लिए गंगा में पर्याप्त जल मिलेगा। पिछले दिनों हुई बारिश के बाद गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। हालांकि इसकी वजह से प्रशासन के सामने चुनौतियां बढ़ गई है। जलस्तर बढ़ने से एक घाट डूब गया है। तमाम जगह कटान की समस्या पैदा हो गई है और मेले में गंगा तट पर बसे शिविरों पर भी खतरा मंडरा रहा है। तमाम घाटों को बचाए रखने के लिए प्रशासन को अतिरिक्त कवायद करनी पड़ रही है। फिलहाल स्नान के लिए 10 घाट तैयार कर दिए गए हैं। बाकी की व्यवस्था पूर्व के स्नानपर्वों की तरह होगी।
पिछले दिनों हुई बारिश के बाद नहरों का पानी नदियों में छोड़ दिए जाने से गंगा का जलस्तर अचानक तेजी से बढ़ा है। सोमवार को स्थिति और खराब हो गई।
प्रशासन ने माघी पूर्णिमा पर स्नान के लिए 11 घाट तैयार किए थे लेकिन जलस्तर बढ़ने से त्रिवेणी मार्ग वाला घाट पूरी तरह से डूब गया। अन्य घाटों पर भी गहराई बढ़ जाने के कारण बैरिकेडिंग को शिफ्ट किया गया। इसकी वजह से कुछ घाटों की चौड़ाई पहले के मुकाबले कम हो गई। इसके साथ ही दंडीबाड़ा के आसपास और मेले में कुछ अन्य स्थानों पर जलस्तर बढ़ने से कटान की समस्या भी पैदा हो गई। सिंचाई विभाग को इस समस्या से निपटने के लिए कई जगह क्रेट लगाने पड़े।
स्थिति नियंत्रण में रहे, सो डीएम भवनाथ सिंह, एडीएम सिटी एसके शर्मा सहित तमाम प्रशासनिक अफसर देर रात तक घाटों का निरीक्षण करते रहे। फिलहाल चुनौतियों के बीच स्नान के लिए दस घाट तैयार कर लिए गए। प्रशासन का अनुमान है कि माघी पूर्णिमा पर तकरीबन 25 लाख श्रद्धालु स्नान के लिए मेला क्षेत्र में पहुंच सकते हैं। एडीएम सिटी ने बताया कि घाटों पर मोबाइल टॉयलेट और चेंजिंग रूम की व्यवस्था पहले की तरह होगी। साथ ही श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए घाटों के आसपास और परेड मैदान पर 450 शिविर भी लगाए गए हैं।