माघ मेला का दूसरा महत्वपूर्ण स्नानपर्व मक र संक्रांति बुधवार को होगा। संक्रांति का पुण्य काल अगले दिन होने से अधिकतर लोग बृहस्पतिवार को संगम सहित गंगा के विभिन्न तटों पर स्नान करेंगे। स्नान के बाद गंगाजल में खड़े होकर अर्घ्य देते हुए सूर्योपासना होगी उसके बाद घाट किनारे ही पूजा-अर्चना कर यथाशक्ति तिल, गुड़, खिचड़ी का दान-पुण्य किया जाएगा।
वहीं मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में त्रिवेणी मार्ग स्थिति शंकराचार्यों के शिविर सहित दंडी बाड़ा, आचार्य बाड़ा, खाक चौक एवं संस्थाओं के शिविरों में खिचड़ी का प्रसाद बटेगा। शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के शिविर में खिचड़ी प्रसाद बांटने के लिए मंगलवार को तैयारी होती रही। इसके अलावा मेला क्षेत्र में विभिन्न संत तथा शंकराचार्यों के शिविर में चल रहीं रास-लीलाएं श्रद्धालुओं को खासा आकर्षित कर रहीं हैं।
मेले में आए लोगों ने स्नान दान के बाद विभिन्न पंडालों में जाकर भगवान श्री कृष्ण की लीला पर आधारित रास का मजा उठाया। मंगलवार को मेला क्षेत्र पहुंचे श्रद्धालु संतों के शिविरों में रामलीला और रासलीला का आनंद लेने पहुंचे। देर रात तक संतों के प्रवचन सुनने को भीड़ पंडालों में जमा रही।
सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी रात 1 बजकर 20 मिनट पर होगा। संक्रांति का पुण्यकाल बृहस्पतिवार को सूर्योदय से लेकर शाम चार बजकर तीन मिनट तक रहेगा।