पौष पूर्णिमा से कल्पवास का आरंभ
पौष पूर्णिमा से कल्पवासियों का व्रत आरंभ हो जाएगा। आचार्य चौक, दंडीवाड़ा, खाक चौक, तीर्थ पुरोहितों के शिविरों के साथ-साथ प्रमुख आध्यात्मिक संस्थाओं के शिविर पूरी तरह तैयार हैं। शनिवार को प्रथम पुण्य स्नान के साथ संगम तट पर आस्था, परंपरा और संस्कृति का अनुपम संगम देखने को मिलेगा। माघ मेला सदियों पुरानी सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक माना जाता है।
शहर से मेला क्षेत्र तक रंगीन संकेतक
मेला क्षेत्र से लेकर शहर तक अलग-अलग रंगों के संकेतक बोर्ड और हेल्प डेस्क लगाए गए हैं। परिवहन व्यवस्था के तहत 3800 रोडवेज बसों का संचालन किया जाएगा। इसके अलावा 75 ई-बसें और 500 से अधिक ई-रिक्शा मेला क्षेत्र में तैनात किए गए हैं। अग्नि सुरक्षा के लिए 17 फायर स्टेशन बनाए गए हैं, जबकि सफाई व्यवस्था के लिए 3300 सफाईकर्मी लगाए गए हैं।
माघ मेले में पहुंच रहे श्रद्धालु।
- फोटो : अमर उजाला।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
मेला क्षेत्र में 17 अस्थायी थाने और 42 पुलिस चौकियां स्थापित की गई हैं। एसपी मेला नीरज कुमार पांडेय ने बताया कि सुरक्षा के लिए लगभग 10 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है।
महाकुंभ अनुभवों पर आधारित व्यवस्थाएं
महाकुंभ के अनुभवों के आधार पर इस बार माघ मेले की तैयारियों का मॉडल तैयार किया गया है। संगम क्षेत्र को जोड़ने के लिए सात पांटून पुल बनाए गए हैं, जबकि फाफामऊ क्षेत्र में दो अतिरिक्त पुल तैयार किए गए हैं। सभी पांटून पुलों को आवागमन के लिए दिशा-विशेष के अनुसार आरक्षित किया गया है, जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही सुगम हो सके।