इस परिसर में 50 से अधिक लोग कल्पवास कर रहे हैं। हालत यह है कि गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के ठेकेदार की ओर से सीवर के लिए गड्ढा खोद कर छोड़ दिया गया है। इससे वहां लगातार पानी बह रहा है। इतना ही नहीं, कल्पवासी राजेंद्र प्रसाद शुक्ल, भोलानाथ तिवारी कहते हैं कि वहां जो नल लगे हैं, उसके नीचे पत्थर तक नहीं बिछाया गया है। ऐसे में पानी गिरने से कीचड़ फैलता जा रहा है।
कई बार जल निगम के वेंडर से शिकायत की गई, लेकिन कोई सुन नहीं रहा है। इसी तरह शौचालय भी कहीं लगे हैं तो कहीं नहीं लग पाए हैं। प्रयागवाल सभा के महामंत्री ऋतुराज मिश्र बताते हैं कि स्वस्थ्य विभाग के वेंडर पर्ची जमा कराने के बाद भी प्रसाधन उपलब्ध कराने में आनाकानी कर रहे हैं। इससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई शिविरों में जहां 24 घंटे बिजली अनुमन्य है, वहां अभी तक कनेक्शन नहीं किए हैं।
गंगोली शिवाला उत्तरी पटरी समेत कई मार्गों पर बिजली आपूर्ति नदारद
माघ मेला के सेक्टरवाइज कई मार्गों पर बिजली न जलने से लोगों को अंधेरे में कल्पवास करना पड़ रहा है। काली मार्ग पर कई खंभों में मरकरी न लगाए जाने से रात को अंधेरा बना रहता है। इसी तरह गंगोली शिवाला मार्ग पर उत्तरी पटरी में अभी तक लाइट नहीं है। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी प्रबंध समिति के अध्यक्ष और मछली बंदर मठ के महंत स्वामी विमलदेव आश्रम ने बिजली आपूर्ति ध्वत होने का आरोप लगाया है।
उनका कहना है कि गंगोली शिवाला उत्तरी पटरी के अलावा हरिश्चंद्र मार्ग और सूरदार मार्ग पर भी बिजली के खंभे शोपीस बने हुए हैं। इन मार्गों पर रात को बिजली न जलने से चोर उचक्कों का भय बना रहता है। कल्पवासी रात के अंधेरे में कई शिविरों में मोमबत्तियां जलाकर रहने के लिए मजबूर हैं।