संगम की रेती पर हंगामे के बीच सोमवार माघ मेला बसाने के लिए भूमि आवंटन आरंभ हो गया। पहले दिन दंडीबाड़ा के दोनों धड़ों की ओर से अलग-अलग सूची के आधार पर भूमि आवंटन के लिए दबाव बनाए जाने की वजह से स्थिति घंटों अनिर्णय की स्थिति बनी रही। अंतत: दोनों धड़ों की ओर से नई सूची में बढ़ाई गई 20 नई संस्थाओं को मेले में भूमि आवंटन से इंकार कर दिया गया। विवाद बढ़ने पर वर्ष 2018 की सूची के आधार पर भूमि वितरण किया गया।
दंडी स्वामीनगर बसाने के लिए सोमवार को मेला प्रशासन ने दो साल पुरानी सूची में दर्ज संस्थाओं के रिकार्ड के आधार पर भूमि आवंटन कराया। पिछली बार मेले में अखिल भारतीय दंडी स्वामी प्रबंध समिति से अलग होकर अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद बनाने वाले स्वामी ब्रह्माश्रम ने 90 बीघा भूमि आवंटित करने के लिए प्रस्ताव दिया था।
जबकि, दंडी स्वामी प्रबंध समिति ने अपनी ओर से अलग सूची प्रस्तुत कर दी। इस पर घंटों तनानती बनी रही। दोपहर दो बजे जगदगुरु स्वामी महेशाश्रम ने जब हस्तक्षेप किया, तब मेला प्रशासन ने दोनों पक्षों को एक साथ बैठाकर पुराने रिकार्ड के आधार पर भूमि वितरण कराया। इसमें दोनों धड़ों की ओर से 10-10 नई संस्थाओं की सूची अस्वीकार कर दी गई।
इतना ही नहीं पिछली बार के माघ मेले में जिन 47 संस्थाओं का रकबा बढ़वा लिया गया था, उसे निरस्त कर दिया गया। दो वर्ष पुराने रिकार्ड में अंकित रकबा ही संस्थाओं को दिया गया।
इस प्रकार कुल 127 संस्थाओं को 70 बीघा भूमि आवंटित की गई। इस मौकेपर दंडी स्वामी प्रबंध समिति के अध्यक्ष स्वामी बिमल देव आश्रम, अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के अध्यक्ष स्वामी ब्रह्माश्रम, शंकर आश्रम के अलावा प्रभारी मेलाधिकारी विवेक चतुर्वेदी, संस्था निरीक्षक चंद्रिका त्रिपाठी समेत कई संत-अफसर उपस्थित थे।
शिविर बसाने के लिए सविधि भूमि पूजन, उतारी आरती
प्रयागराज। दंडीबाड़ा की भूमि आवंटित करने से पहले सोमवार को संतों और अफसरों ने मेला बसाने के लिए भूमि पूजन किया। सविधि मंत्रोच्चार के साथ भूमि पूजन किया गया। इस दौरान त्रिवेणी संगम से निर्विघ्न मेला बसाने के लिए आराधना की गई। स्वामी ब्रह्माश्रम ने बताया कि सुविधा पर्ची जारी होने के बाद 27 दिसंबर से शिविर लगने शुरू हो जाएंगे।