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Prayagraj : नैनी जेल में भी रहा माफिया मुख्तार के शूटर जीवा का आतंक, माफिया डॉन ने दी थी शरण

Thu, 08 Jun 2023 11:27 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

जेल सूत्रों के मुताबिक, जीवा 24 अप्रैल 2009 को नैनी जेल लाए जाने से पहले आजमगढ़ जेल में बंद था। वहां अपने आतंक व आपराधिक नेटवर्क के जरिए वह जेल से ही जरायम के धंधे संचालित करने लगा, जिसकी जानकारी पर जिम्मेदारों के हाथ-पांव फूल गए।
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गैंगस्टर संजीव जीवा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लखनऊ जिला न्यायालय में पेशी पर आए जिस कुख्यात संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा को गोलियों से भून दिया गया, उसका आतंक केंद्रीय कारागार नैनी में भी रहा। माफिया डॉन बाहुबली मुख्तार का यह शूटर यहां करीब चार साल तक निरुद्ध रहा। इस दौरान अन्य बंदी उसके खौफ में रहे। यही नहीं इससे पहले पूर्वांचल में आपराधिक वारदातें करने के बाद उसने छिपने के लिए कई बार प्रयागराज(तत्कालीन इलाहाबाद) में ठिकाना बनाया और इसमें उसकी मदद माफिया डॉन दिलीप मिश्रा ने की।            

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जेल सूत्रों के मुताबिक, जीवा 24 अप्रैल 2009 को नैनी जेल लाए जाने से पहले आजमगढ़ जेल में बंद था। वहां अपने आतंक व आपराधिक नेटवर्क के जरिए वह जेल से ही जरायम के धंधे संचालित करने लगा, जिसकी जानकारी पर जिम्मेदारों के हाथ-पांव फूल गए। इसके बाद आनन-फानन में प्रशासनिक आधार पर उसे नैनी जेल स्थानांतरित कर दिया गया था। इस समय तक उसके खिलाफ 20 मुकदमे न्यायालय में विचाराधीन थे।

सूत्रों का कहना है कि सभी जानते थे कि जीवा बाहुबली माफिया डॉन मुख्तार अंसारी का शूटर है। उधर जेल में निरुद्ध अन्य बंदियों व कर्मचारियों को जब यह पता चला कि मुहम्मदाबाद विधायक कृष्णानंद राय को एके-47 से छलनी करने वालों में उसका भी नाम सामने आया था, तो वह उससे खौफ खाने लगे।

सूत्र बताते हैं कि यही वजह थी कि जेल में आने के कुछ ही दिनों के भीतर कई दुर्दांत अपराधी जीवा की शागिर्दी में चले गए थे। अपने खौफ के बदौलत ही उसने जेल में भी जमकर आतंक फैलाया। 2010 में सीबीआई लखनऊ की स्पेशल क्राइम ब्रांच ने जालसाजी, धोखाधड़ी व आपराधिक साजिश के एक मामले में उसे आरोपी बनाया और कोर्ट से वारंट जारी कराकर इसे नैनी जेल में तामीला कराया।

हाईसिक्योरिटी बैरक में रखा गया था

सूत्र बताते हैं कि जीवा जिस मुकदमे में जेल में निरुद्ध था, अप्रैल 2012 में उसकी सजा पूरी हो गई। लेकिन अन्य मुकदमे विचाराधीन होने के कारण रिहाई नहीं मिल सकी। तीन साल आठ महीने बाद 16 दिसंबर 2012 को प्रशासनिक आधार पर उसे नैनी से जिला कारागार रायबरेली स्थानांतरित कर दिया गया था। इसके बाद जेल अफसरों ने राहत की सांस ली थी।

इस मामले में तत्कालीन वरिष्ठ जेल अधीक्षक अम्बरीष गौड़ का कहना है कि जेल में आतंक जैसी बात तो नहीं थी। हालांकि कुख्यात अपराधी होने के चलते उसे कड़ी सुरक्षा में रखा गया था। साथ ही निरंतर निगरानी की जाती थी। उसे हाई सिक्योरिटी बैरक में रखा गया था।
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लालापुर में भी कुछ दिनों तक बनाया था ठिकाना
एसटीएफ के सूत्र बताते हैं कि इससे पहले माफिया डॉन दिलीप मिश्रा की मदद से कई बार उसके प्रयागराज में शरण लेने के इनपुट भी मिले थे। हालांकि वह पकड़ा नहीं जा सका था। पूर्वांचल में एक बड़ी वारदात के बाद उसके कुछ दिनों तक लालापुर में भी ठिकाना बनाने की बात सामने आई थी।

साले व शूटर को किया था गिरफ्तार

2010 में जीवा का नाम एक बार फिर तब चर्चा में आया, जब उसके शागिर्द गाजीपुर के नया कोतवाली निवासी रवि गुप्ता व साले दिल्ली निवासी नरेंद्र शर्मा को मानसरोवर टाकीज के पास से गिरफ्तार किया गया था। एसटीएफ सूत्र बताते हैं कि दोनों से पूछताछ में यह बात सामने आई थी कि वह जेल से पेशी पर ले जाने के दौरान पुलिस काफिले पर हमला कर जीवा को छुड़ाने की प्लानिंग कर रहे थे। कई बार उससे नैनी जेल में जाकर मिल भी चुके थे।

पूर्व मंत्री की ली थी सुपारी
नरेंद्र व रवि से पूछताछ में सनसनीखेज खुलासा हुआ था। यह बात सामने आई थी कि जीवा फरार होकर एक पूर्व मंत्री की हत्या करने की प्लानिंग में है। जेल में रहते ही उसने हत्या की सुपारी ली थी। लेकिन इससे पहले ही उसके साले व शागिर्द को पकड़ लिया गया, जिससे यह पूरे प्लान पर पानी फिर गया।
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