हाईकोर्ट ने हमीरपुर के माफिया भूपेंद्र यादव की दूसरी जमानत अर्जी नामंजूर कर दी है। हत्या के प्रयास के मामले में इससे पहले कोर्ट 29 अगस्त 2016 को भी जमानत अर्जी नामंजूर कर चुकी है। इसके बाद दोबारा जमानत अर्जी दाखिल की गई थी। जमानत पर न्यायमूर्ति ओमप्रकाश ने सुनवाई की।
कोर्ट ने कहा कि याची के खिलाफ गंभीर आपराधिक मुकदमे हैं इसलिए जमानत दिए जाने का औचित्य नहीं है। प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता विनोद कांत और स्पेशल काउंसिल स्वाती अग्रवाल ने जमानत अर्जी का विरोध किया। अधिवक्ताओं का कहना था कि याची के खिलाफ गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। उसका लंबा आपराधिक इतिहास है और उसके डर के कारण कोई उसके खिलाफ गवाही नहीं देता है इसीलिए वह तमाम मुकदमों में बरी हो गया है।
प्रदेश सरकार और वादी मुकदमा ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल अपील दाखिल की है, जो अभी लंबित है। ऐसी स्थिति में याची को जमानत पर रिहा किया जाना उचित नहीं है, क्योंकि वह समाज के लिए एक आतंक है, जिसका जेल में ही रहना उचित है।
बचाव पक्ष का कहना था कि उसके खिलाफ तमाम मुकदमे राजनीतिक विद्वेष के कारण दर्ज कराए गए हैं। ज्यादातर में वह बरी हो चुका है। सिर्फ एसएलपी लंबित होने के आधार पर उसे जेल में नहीं रखा जा सकता है। याची साढ़े चार वर्षों से जेल में बंद है। कोर्ट ने लंबे आपराधिक इतिहास को देखते हुए जमानत अर्जी नामंजूर कर दी है।