हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के वकीलों और स्वास्थ्य विभाग कर्मचारियों के बीच मारपीट और उसके बाद हुए बवाल तथा तोड़फोड़ की घटना को लेकर पुलिस की जांच से हाईकोर्ट असंतुष्ट है। सात जजों की वृहद पीठ इस मामले की मॉनिटरिंग कर रही है। शुक्रवार को पीठ ने जांच की प्रगति जाननी चाही तो उसमें कई खामियां नजर आईं। पीठ ने पूछा है कि पुलिस ने लखनऊ खंडपीठ के रजिस्ट्रार और अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों के बयान क्यों नहीं लिए गए हैं।
आदेश दिया है कि निष्पक्ष जांच कर बताया जाए कि कोर्ट परिसर में पुलिस घुसी थी या नहीं। पुलिस किसके आदेश से अदालत परिसर में गई और आंसू गैस के गोले दागे। प्रमुख सचिव गृह से 25 मई तक रिपोर्ट मांगी गई है। विवेचनाधिकारी को इस तलब किया है। अवध बार एसोसिएशन की ओर से हलफनामा दाखिल कर बताया गया कि पुलिस जानबूझकर वकीलों को टारगेट कर रही है।
जांच निष्पक्ष नहीं है। बार की ओर से घटना की सीडी और फोटोग्राफ कोर्ट में दिए गए। अपर महाधिवक्ता बुलबुल गोंदियाल ने जांच रिपोर्ट दाखिल कर बताया कि पुलिस कोर्ट परिसर में नहीं गई थी। नौ संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें से छह वकील और तीन स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी हैं। अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। अवध बार के अध्यक्ष ने इस रिपोर्ट को झूठ का पुलिंदा करार दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि किसी को भी टारगेट किए बिना निष्पक्ष जांच कराई जाए।