हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में दस फरवरी को हुए वकीलों के बवाल और लाठीचार्ज की घटना की न्यायिक जांच के लिए हाईकोर्ट तैयार है। जांच हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से कराई जा सकती है। मामले की सुनवाई कर रही सात जजों की पीठ ने मंगलवार को प्रदेश सरकार और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन तथा अवध बार एसोसिएशन के अध्यक्षों को जांच का दायरा और शर्तें आपस में तय करने को कहा है। अगली सुनवाई 26 फरवरी को इस आशय का आदेश दिया जा सकता है। वृहदपीठ ने दोनों बार एसोसिएशन के अध्यक्षों की कमेटी बनाकर उनको सुझाव देने के लिए कहा है कि किस प्रकार से प्रैक्टिस नहीं करने वाले वकीलों को रोका जा सकता है।
अवध बार एसोसिएशन के अध्यक्ष परिहार ने वृहदपीठ के समक्ष उपस्थित होकर वकीलों का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि जिस मीडिया रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया है, वह निष्पक्ष नहीं है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य निदेशालय के कर्मचारियों ने छत से पथराव शुरू किया इसके बाद मामला बिगड़ा। सीआरपीएफ और पीएसी वालों को कुछ पत्थर लगे तो वह हाईकोर्ट परिसर में घुस गए और लाठीचार्ज कर दिया। महिला वकीलों को भी पीटा गया। वृहद पीठ ने अवध बार से ऐसे वकीलोें को चिह्नित कर जानकारी देने के लिए कहा जो बवाल में शामिल थे। उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, इसकी भी जानकारी मांगी है। वृहदपीठ इस बात पर बेहद नाराज थी कि वकील ड्रेस पहनने के बाद आगजनी और पथराव कर रहे थे। पेशे की गरिमा तथा मर्यादा का ध्यान रखे बिना उनके द्वारा किए गए कार्य को सही कैसे ठहराया जा सकता है।
अवध बार अध्यक्ष ने सफाई दी कि वह बवाल करने वाले वकीलों का समर्थन नहीं करते हैं। बार हड़ताल के पक्ष में भी नहीं है। हड़ताल में शामिल न होने पर एक सरकारी वकील के निलंबन को भी बार अध्यक्ष ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
वृहदपीठ सबसे अधिक नाराज अधिवक्ता विशाल दीक्षित द्वारा सरेआम पिस्टल लहराने को लेकर दिखी। जजों ने कहा कि अधिवक्ता के ड्रेस में पिस्टल निकालना पूरे समाज के सामने वकीलों की मर्यादा को गिराना है। इस घटना से पूरी अधिवक्ता कौम बदनाम हुई है। विशाल ने स्वयं अपनी सफाई रखने की कोशिश की मगर अदालत उनकी दलीलों से सहमत नहीं थी। उनके हलफनामे और माफ मांगने के तरीके से भी जज संतुष्ट नहीं थे। उनको अपनी सफाई रखने का एक और अवसर दिया गया है। पीठ ने लखनऊ बेंच के सीनियर रजिस्ट्रार से बदसलूकी करने वालों की भी पहचान करने का निर्देश दिया है।
लखनऊ बवाल की इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई को लेकर एक अधिवक्ता की आपत्ति को खारिज करते हुए वृहदपीठ ने साफ किया इस मामले की सुनवाई इलाहाबाद में होगी, घटना चाहे प्रदेश के किसी भी जिले की हो। क्योंकि सात जजों की बेंच पिछले एक साल से इन्हीं मुद्दों पर सुनवाई कर रही है।