लखनऊ और आगरा के बीच प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे के निर्माण की बाधा दूर हो गई है। एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर दाखिल किसानों की याचिकाएं हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। फिरोजाबाद के कई किसान अधिग्रहण के खिलाफ आए थे। उनका कहना था कि सरकार ने किसानों की आपत्तियों का निस्तारण किए बिना जमीनें अधिग्रहीत कर ली हैं। सरकार ने 19 अक्तूबर 2013 और 30 अक्तूबर 2014 को अधिग्रहण की अधिसूचना जारी की थी।
फिरोजाबाद जिले के असलेमपुर नगला, कन्हार और उरावर हस्तरफ आदि गांवों के किसानों ने याचिकाएं दाखिल कर अधिग्रहण को चुनौती दी थी। इस पर न्यायमूर्ति कृष्णमुरारी और न्यायमूर्ति पीके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सुनवाई की। महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया नियमानुसार सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद प्रारंभ की गई है। सभी आपत्तियों का निस्तारण भी कर दिया है। मुआवजा निर्धारित दर पर ही दिया जा रहा है। खंडपीठ ने कहा कि आपत्तियों का निस्तारण नियमानुसार किया गया है। इसमें कुछ भी असंतोष जनक नहीं है, इसलिए याचिकाएं बलहीन हैं।