प्रतापगढ़ संसदीय सीट पर रजवाड़ों का शुरू से दखल रहा है। लोकसभा चुनावों में दस बार राजघरानों ने जीत हासिल की। इसमें सात बार अकेले कालाकांकर राजघराने का कब्जा रहा। चार बार पूर्व विदेश मंत्री राजा दिनेश सिंह और तीन बार उनकी बेटी रत्ना सिंह सांसद बनीं। तीन बार प्रतापगढ़ राजघराने ने संसदीय सीट पर जीत हासिल की। दो बार राजा अजित प्रताप सिंह तो एक बार उनके बेटे अभय प्रताप सिंह सांसद बने।
फिर आमने-सामने हैं राजा भैया और प्रमोद तिवारी
सियासत के दो बड़े चेहरे राजा भैया और प्रमोद तिवारी एक बार फिर आमने-सामने हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस का गठबंधन होने के बाद दोनों नेता एक मंच पर नजर आए थे। लोकसभा चुनाव में राजा भैया अपनी पार्टी के प्रत्याशी अक्षय प्रताप के लिए प्रचार कर रहे हैं तो कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने रत्ना सिंह के पक्ष में पूरी ताकत झोंक रखी है।
गठबंधन और भाजपा ने तेज की राजा भैया की घेराबंदी
प्रतापगढ़ के मतदाता दो सांसदों का चुनाव करते हैं। प्रतापगढ़ संसदीय सीट में पांच विधानसभा रामपुर खास, सदर, पट्टी, रानीगंज और विश्वनाथगंज हैं। जबकि राजा भैया के गढ़ कुंडा और बाबागंज विधानसभा के मतदाता कौशाम्बी के सांसद का चुनाव करते हैं। प्रतापगढ़ और कौशाम्बी दोनों ही सीटों पर राजा भैया के उम्मीदवार मजबूती से लड़ रहे हैं। ऐसे में सपा-बसपा गठबंधन के साथ भाजपा ने भी उनकी घेराबंदी तेज कर दी है।
हाशिए पर मुद्दे, जातिगत लड़ाई में फंसे नेता
लोकसभा चुनाव में यहां मुद्दे हाशिए पर हैं और नेता पूरी तरह जातिगत लड़ाई में फंसे हैं। रोजगार के नाम पर जिले में कुछ भी नहीं है। आंवला जिले की पहचान है, लेकिन सुविधाएं और प्रोत्साहन न मिलने के कारण किसान इसकी खेती से मुंह मोड़ते जा रहे हैं। सिस्टम की खामियों के चलते आंवला किसानों का सारा मुनाफा बिचौलिए खा जाते हैं। शहर से सटे कटरामेदनीगंज में पूर्व विदेश मंत्री राजा दिनेश सिंह के प्रयास से खुली एटीएल (आॅटो ट्रैक्टर लिमिटेड) फैक्ट्री बंद हो गई है। 1981 में खुली इस कंपनी में 1998 में ताला लग गया। इसमें 3200 कर्मचारी कार्यरत हैं। अभी भी उनका करोड़ों का बकाया है।