संगठन में हो सकता है बड़ा उलटफेर
बात अगर इलाहाबाद की करें तो यहां भी संगठन के पदाधिकारी दावे तो तमाम करते रहे, लेकिन धरातल पर संगठन उस तरह से काम नहीं कर रहा था जिस तरह की उम्मीद की जा रही थी। महानगर अध्यक्ष राजेंद्र मिश्र, यमुनापार अध्यक्ष विनोद प्रजापति, गंगापार अध्यक्ष कविता पटेल की कार्यशैली भी पूरे चुनाव भर प्रश्नवाचक बनी रही।
दरअसल, भाजपा संगठन यह मानकर चल रहा था कि पिछले दो चुनाव में मोदी के नाम पर वोट पड़े हैं। इस बार भी पड़ जाएंगे। कम मतदान पर शीर्ष नेतृत्व पहले ही नाराजगी जता चुका है। अब इलाहाबाद सीट गंवाने और फूलपुर मामूली अंतर से जीतने पर माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में संगठन में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
इस बीच भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष नरेंद्र देव पांडेय ने भी संगठन पदाधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। नरेंद्र देव बताते हैं कि स्थानीय संगठन ही हार की प्रमुख वजहाें में शामिल है। उन्होंने बताया कि प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के तमाम पदाधिकारी यहां आए तो जरूर, लेकिन बैठकों तक ही वह सीमित रहे। स्थानीय संगठन ने उन नेताओं को किसी भी गांव आदि का दौरा तक नहीं कराया। इतना ही नहीं, विपक्ष की ओर से संविधान व आरक्षण को लेकर जो बयानबाजी की जा रही थी, उसकी सफाई भी वोटरों तक संगठन के पदाधिकारी नहीं दे सके।
इलाहाबाद के विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा को मिले मत का ब्योरा
विधानसभा - वर्ष 2024 -वर्ष 2019-
मेजा ----70034 ---86222
करछना ----80032 ---98832
दक्षिणी ----86312---98470
बारा ----79442 ----103723
कोरांव -----86422----105957