भारतीय रेलवे ने रेल संरक्षा और आधुनिकीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है। उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) ने लोको पायलटों को कवच (स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली) का प्रशिक्षण देने के लिए देश का पहला वर्चुअल रियलिटी आधारित प्रशिक्षण शुरु किया है।
भारतीय रेलवे ने रेल संरक्षा और आधुनिकीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है। उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) ने लोको पायलटों को कवच (स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली) का प्रशिक्षण देने के लिए देश का पहला वर्चुअल रियलिटी आधारित प्रशिक्षण शुरु किया है। इस अत्याधुनिक सिम्युलेटर को कानपुर स्थित बहु-विषय मंडलीय प्रशिक्षण संस्थान में तैनात किया गया है। प्रयागराज से कई लोको पायलट वहां प्रशिक्षण के लिए भेजे गए हैं।
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यह नई प्रणाली लोको पायलटों को बिना किसी भारी-भरकम बुनियादी ढांचे के डिजिटल रूप से एक वास्तविक लोकोमोटिव वातावरण का अनुभव कराएगी। वर्चुअल रियलिटी तकनीक के माध्यम से पायलटों की जानकारी याद रखने की क्षमता में 40 फीसदी तक का सुधार होगा।
इसमें सिग्नल जंप करने की रोकथाम और आपातकालीन एसओएस जैसे 12 कठिन परिचालन मोड का अभ्यास सुरक्षित वातावरण में किया जा सकेगा। एनसीआर के सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी का कहना है कि पारंपरिक भारी सिम्युलेटरों के विपरीत, इस वर्चुअल रियलिटी किट को आसानी से किसी भी छोटे स्टेशन या डीजल शेड में ले जाकर प्रशिक्षण दिया जा सकता है।
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एनसीआर के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर मध्य रेलवे देश के सबसे व्यस्त रूटों में से एक है। वर्चुअल रियलिटी एकीकरण तकनीक-सशक्त कार्यबल की ओर हमारा पहला कदम है, जिससे रेल संचालन अधिक सुरक्षित और सटीक बनेगा। इस तकनीक के आने से अब लोको पायलटों की त्वरित निर्णय लेने की क्षमता में भारी सुधार होगा। इससे भविष्य में रेल दुर्घटनाओं की संभावना को न्यूनतम करने में बड़ी मदद मिलेगी।