जिला अदालत ने चाचा की हत्या करने के मामले में दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) अंजू कनौजिया की अदालत ने दिया।
औद्योगिक थाना क्षेत्र के बेलवट गांव निवासी अनुज यादव के खिलाफ औद्योगिक थाने में हत्या के आरोप में एफआईआर दर्ज हुई थी। अभियोजन के अनुसार 28-29 अक्तूबर 2015 की रात रामरूप उर्फ साधू यादव अपने घर के ओसारे में सो रहे थे। उनके पास ही चारपाई पर भतीजा अनुज यादव भी सोया था। सुबह रामरूप का शव खून से लथपथ मिला। उनकी गर्दन कुल्हाड़ी से काटी गई थी। घटनास्थल से खून से सनी कुल्हाड़ी बरामद हुई जबकि अनुज वहां से गायब था।
सुनवाई के दौरान जिला शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि अभियोजन ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की मजबूत श्रंखला से आरोप सिद्ध किया है। वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने मामले को परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित बताते हुए दोषी की मानसिक स्थिति और पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देकर नरमी बरतने की मांग की।
अदालत ने कहा कि दोषी ने अपने ही चाचा की अत्यंत क्रूरतापूर्वक हत्या की, जो जघन्य अपराध है। हालांकि यह मामला दुर्लभतम में दुर्लभ की श्रेणी में नहीं आता। अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।