इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के समर्थन में शुक्रवार को ईश्वर शरण महाविद्यालय में ऑटा एवं ऑक्टा की संयुक्त बैठक हुई। बैठक में शिक्षकों ने कहा कि दिल्ली चकर प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति से मिलकरर हमें अपनी बात रखनी चाहिए। बैठक के बाद ऑटा एवं ऑक्टा ने संयुक्त रूप से इविवि के विजिटर यानी राष्ट्रपति को पत्र भेजकर मांग की कि कुलपति को अपना कार्यकाल निर्बाध रूप से पूरा करने दिया जाए, क्योंकि उन्हें इविवि के बेहतरी के लिए कई काम किए हैं।
बैठक के दौरान कुछ शिक्षकों ने कहा कि अब अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर देनी चाहिए लेकिन वरिष्ठ शिक्षकों ने कहा कि इससे छात्रों का नुकसान होगा। अभी हम कक्षाएं लेते हुए अपना विरोध दर्ज कराएंगे। डीन कॉलेज डेलवमेंट प्रोफेसर जगदंबा सिंह ने कहा कि सत्य के मार्ग पर चलने से हमारी विजय होगी। डीएसडब्ल्यू प्रो. हर्ष कुमार ने कहा कि कुछ मठाधीशों के कारण आज यह स्थिति आई है। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आनंद शंकर सिंह ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ कुलपति के लिए नहीं बल्कि विश्वविद्यालय के गौरव, शिक्षकों की प्रतिष्ठा, संस्थानों की स्वायत्तता एवं छात्रों के कल्याण के लिए है। बैठक में के बाद ऑटा अध्यक्ष प्रो. रामसेवक दुबे और ऑक्टा अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र पाल सिंह ने संयुक्त रूप से राष्ट्रपति को पत्र लिखकर उन्हें इविवि के हित में कुलपति की ओर से किए गए कार्यों से अवगत कराया और मांग की कि कुलपति को अपना कार्य करने दिया जाए। बैठक का ंसचालन ऑक्टा महासचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह ने किया।
एक तरफ शिक्षक कुलपति के समर्थन में खड़े हुए हैं तो दूसरी ओर छात्र खुलकर कुलपति का विरोध कर रहे हैं। छात्र रजनीकांत के आत्महत्या कर लेने से आहत साथी छात्रों ने शुक्रवार से डीएसडब्ल्यू कार्यालय पर क्रमिक अनशन शुरू कर दिया। साथ ही छात्रों ने बालसन चौराहे तक कैंडल मार्च निकाला।
छात्रसंघ के वर्तमान एवं पूर्व पदाधिकारी मांग कर रहे हैं कि कुलपति अपना इस्तीफा दें। साथ ही छात्र नेताओं ने उन शिक्षकों पर भी निशाना साधा, जो कुलपति के समर्थन में खड़े हैं। छात्रसंघ महामंत्री शिवम सिंह का कहना है कि जब तक रजनीकांत के परिजनों को उचित मुआवजा नहीं मिल जाता, छात्र आंदोलन जारी रखेंगे। कुलपति के समर्थन में खड़े शिक्षकों को कम से कम एक बार यह जरूर सोचना चाहिए कि जिस छात्र ने आत्महत्या की है, उसके परिजनों के लिए उन्होंने क्या किया।
छात्रों के आंदोलन में शामिल होने के लिए शिक्षकों के पास समय नहीं है गंभीर आरोपों से घिरे कुलपति को बचाने के लिए वे दिल्ली भी जाने को तैयार हैं। यह शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है। पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह और रोहित मिश्र ने भी कुलपति का समर्थन कर रहे शिक्षकों पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि जिस संस्था का एक विद्यार्थी असंवेदनशीलता, भ्रष्ट व्यवस्था का शिकार होकर आत्महत्या कर लेता है उस संस्था के शिक्षक संघ को इस गंभीर मसले पर चर्चा करने की फुर्सत नहीं है। वह इकट्ठा भी हुए तो ऐसे कुलपति के लिए जो चौतरफा गंभीर आरोपों से घिरे हुए हैं।